बैतूल। बैतूल में रज्जढ़ समाज कांटों से गुलदस्तों की तरह खेलते हैं। कांटों पर लेटते हैं, सोते हैं और आसन जमाते हैं। यह समाज खुद को पांडवों का वंशज बताता है। हर साल हिंदी के अगहन महीने यानी नवंबर-दिसंबर के बीच के दिनों में ये लोग जश्न और दुख मनाते हैं। कांटों का बिस्तर बनाकर उस पर लेटते हैं। इस परंपरा को रज्जढ़ समाज के युवा ही नहीं, बुजुर्ग भी निभाने में गर्व समझते हैं, लेकिन डॉक्टर की मानें तो ऐसा करना खतरनाक ही नहीं, जानलेवा भी साबित हो सकता है। इस परंपरा के पीछे एक रोचक कहानी भी छिपी है, आइए जानते हैं …

कहा जाता है कि एक बार पांडव जंगल में शिकार करने गए थे। पानी नहीं मिलने पर व्याकुल हो गए। पानी देने के बदले नाहल समाज के लोगों ने पांडवों के सामने बहन ब्याहने की शर्त रख दी। इसी घटना की याद में हर साल अगहन महीने में पूरे पांच दिन रज्जढ़ इसी वाक्ये को याद कर गम और खुशी मनाते हैं। वे खुद को पांडवों का वंशज मानकर खुश होते हैं, तो इस गम में दुखी होते हैं कि उन्हें अपनी बहन को नाहल के साथ विदा करना पड़ा।

कांटों का बिस्तर बनाकर लगाते हैं लोट।

कांटों का बिस्तर बनाकर लगाते हैं लोट।

समाज के लोग दुख के साथ खुशी भी मनाते हैं।

समाज के लोग दुख के साथ खुशी भी मनाते हैं।

टिटनेस होने का खतरा

डॉ. रानू वर्मा के मुताबिक कांटों के चुभने से त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं। टिटनेस होने का भी खतरा रहता है। टिटनेस एक गंभीर बैक्टीरिय बीमारी होती है। टिटनेस बैक्टीरिया का घाव के जरिए शरीर में प्रवेश करने के बाद मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं। काफी दर्द होता है।

इन्फेक्शन के बाद टिटनेस के संकेत और लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं :-

  • गर्दन की मांसपेशियों में अकड़न
  • पेट की मांसपेशियों में अकड़न
  • शरीर में दर्द रहना
  • निगलने में कठिनाई
  • जबड़ों में ऐंठन और अकड़न
डॉक्टर के मुताबिक कांटे के जख्म से टिटनेस होने का खतरा रहता है।

डॉक्टर के मुताबिक कांटे के जख्म से टिटनेस होने का खतरा रहता है।

By Vishal

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