18 अगस्त को होने वाली एक दिवसीय हड़ताल तय करेगी भारतीय कोयला उद्योग का भविष्य – डॉ. मोदी

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सारनी। भारत सरकार के सार्वजनिक उद्योग के कोयला उद्योग में सरकार की नीति कमर्शियल माइनिंग, विनिवेश के निर्णय के विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल की गई, जो शत प्रतिशत सफल रही थी। जिसके बाद सरकार ने संपूर्ण निजीकरण के लिए बहुत बड़ा विनिवेश लक्ष्य रखा है। जिसे लेकर सरकार ने अब घोषणा की है कि रणनीतिक क्षेत्रों में 4 को छोड़कर सभी सार्वजनिक उद्योगों का अब निजीकरण किया जाएगा।फिलहाल कोरोना वायरस महामारी ने सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2021 से 1 लाख करोड़ रुपय जुटाने की विनिवेश योजना के पहियों पर ब्रेक लगा दिया है। वही 28 जुलाई को राष्ट्रीय एटक की वर्चुअल मीटिंग के दौरान कोयला उद्योग में आगामी हड़ताल पर सुझाव डॉ कृष्णा मोदी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एटक कोल उद्योग सह पूर्व जेबीसीसीआई सदस्य ने दिए। डॉ. मोदी ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 41 कोल ब्लॉकों की नीलामी के फाइनल टेंडर के लिए घोषित 18 अगस्त के दिन फिर से कोल इंडिया में सभी श्रमिक संगठनों ने एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान कर दिया है। 1 अगस्त को संयुक्त रूप से हड़ताल का नोटिस देने का निर्णय लिया गया है। हड़ताल का नोटिस देने के दिन से ही कोयला उद्योग में वर्क टू रुल, रैली प्रदर्शन, गेट मीटिंग, पीट मीटिंग आदि का कार्यक्रम भी शुरू हो जाएगा। जिसमें 6 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल की जायेगी। जिसमें कोल उद्योग से कमर्शियल माइनिंग का निर्णय वापस लिया जाए। कोल इंडिया के शेयरों के विनिवेश अथवा बाई बैक पर तत्काल रोक लगाई जाए। सीएमपीडीआई को कोल इंडिया से अलग करने की योजना पर तत्काल रोक लगाई जाए। कोल इंडिया में ठेका मजदूरों के हाई पावर कमेटी द्वारा लिए गए निर्णय में बड़ा हुए वेतन लागू किया जाए। कोल इंडिया एपेक्स जे.सी.सी की बैठकों के दौरान उठाए गए मुद्दों सहित कोल वेज एग्रीमेंट के खंड 9.3.0/9.4.0/9.5.0 का कर्यावयन सुनिश्चित किया जाने एवं 2 से 4 जुलाई 2020 की हड़ताल में कोल इंडिया के जिन पदाधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अति सक्रियता दिखाई है उनपर कार्यवाही करने की मांग शामिल हैं।

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