संतो का काम समाज को जगाते रहना – पंडित अरुण गोस्वामी

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  • तीसरे दिन विभिन्न लघुकथा का किया वाचन

सारनी। संतो का काम समाज में जागरूकता और सनातन धर्म के प्रति जगाते रहने का कार्य है,यदि समाज संतों की बातों से नहीं जागे नहीं चेते तो इसमें संतों की का क्या कसूर यह उद्गार बैकुंठ धाम आश्रम ग्राम सलैया में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत कथा के तीसरे दिन उत्तरप्रदेश के झांसी से आए पंडित अरुण गोस्वामी के मुखारविंद से कहा गया उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के प्रति प्रभु के प्रति संतों का काम जागृत करते रहना है और संत अपने कार्य का निर्माण बखूबी कर रहे हैं। लेकिन धन रूबी मोह माया को कोई अपने बस में नहीं कर पाया है। यही वजह है कि भौतिक सुख सुविधाओं के पीछे आदमी सब काम को छोड़कर लगा रहता है। जिसकी वजह से वह प्रभु की आराधना करने से वंचित रह जाता है। जबकि जीवन के चौथे पड़ाव में जब व्यक्ति के पास कोई काम नहीं बनता तो उसे फिर प्रभु की स्मरण प्रभु की याद आती है और वह अपने सभी कार्यों से मुक्त होकर प्रभु की श्रद्धा और सुमन में लगा रहता है। इस अवसर पर उत्तरप्रदेश के झांसी से पधारे पंडित अरुण गोस्वामी के माध्यम से विभिन्न लघु कथा के माध्यम से महिलाओं को समझाने का प्रयास किया है,उन्होंने कहा कि यदि बहूए अपने सास और ससुर को मां और पिता का दर्जा दे तो कभी भी समाज में वृद्धा आश्रम नहीं खुल सकता लेकिन आज की बहुए अपने बेटे को सरवन बनाना चाहती है लेकिन दूसरों के बेटे से  उनके मां-बाप से अलग करना चाहती है जिसकी वजह से समाज में श्रद्धा आश्रम  खुल रहे हैं जो समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकते ऐसी स्थिति में सनातन धर्म के माध्यम से प्रभु की आराधना में लीन रहने का कार्य किया जाना चाहिए। बैकुंठ धाम आश्रम के महंत संगीत दास महाराज एवं चेतन महाराज ने संपूर्ण क्षेत्र वासियों से अपील की है कि गुरु पूर्णिमा महापर्व के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत सलैया के बैकुंठ धाम आश्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर 5 दिवसीय इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान प्रदान करें। बैकुंठ धाम आश्रम स्थल पर कथा के समय बड़ी संख्या में महिला पुरुष कथा का श्रवण कर रहे थे।

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