आदिवासी समाज को उसकी मेहनत के अनुरूप नहीं मिलता है लाभ – सांसद

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  • 10 करोड 37 लाख 19 हजार की लागत से निर्माण चार बैराज का किया गया भूमि पूजन

सारनी। आदिवासी समाज मेहनती समाज होता है लेकिन उसके मेहनत के अनुरूप उसका प्रतिफल उन्हें प्राप्त नहीं हो पा रहा है इस वजह से रोजगार की तलाश में अब आदिवासी दूसरे जिले एवं राज्यों में पलायन करने लगे हैं यह उद्गार बैतूल हरदा हरसूद क्षेत्र के सांसद दुर्गादास उईके ने जल संसाधन विभाग मध्यप्रदेश शासन के माध्यम से चार बैराज की भूमि पूजन के अवसर पर विसलदेही मैं ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा मेहनत का काम यदि कोई समाज करता है तो वह आदिवासी है लेकिन उन्हें उसकी मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा है लेकिन प्रदेश सरकार के माध्यम से नदियों पर बैराज का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है।उससे जल संग्रह का दायरा बढ़ेगा और आदिवासी समाज का किसान अपने खेतों में गेहूं,धान,चना,मटर,मूंग सहित विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन बढ़ाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है इसके अलावा उन्होंने लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर अशोक झरबड़े को यह निर्देशित किया कि पहाड़ी क्षेत्रों से निकलने वाली नदियों पर कहां कहां बैराज बनाकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध किया जा सकता है इस पर काम किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि एक ही परिवार ने सत्ते का सुख भोगा है इस वजह से आदिवासियों का वह संपूर्ण विकास कार्य नहीं हो सका जो होना चाहिए था लेकिन केंद्र और प्रदेश में बैठी भारतीय जनता पार्टी की सरकार आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रही है। आमला विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को खेत तक पानी कैसे पहुंचाया जा सकता है इस पर विचार विमर्श करके गांव में पानी पहुंचाने का हर संभव प्रयास कर रही है, उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए चार बैराज मांगे थे और उनकी मांगों को उन्होंने पूरा भी किया है उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि 15 माह की कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल में उनके विधानसभा की सबसे ज्यादा उपेक्षा की गई लेकिन उनकी सरकार जाने के बाद आमला विधानसभा में वह सभी विकास कार्य हो रहे हैं जो उन्हें लंबे समय से करवाना था उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही और बैराज की और सौगात मिलेगी साथ ही उनके विधानसभा क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाने का कार्य किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के जिला मंत्री कमलेश सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यह भी आदिवासियों के संपूर्ण विकास को ध्यान में रखकर कोई सरकार काम कर रही है तो वह है भारतीय जनता पार्टी की सरकार आदिवासियों के गांव में कैसे विकास किया जा सकता है उन्हें मुख्यधारा से कैसे जोड़ा जा सकता है इस पर उनका सबसे ज्यादा ध्यान रखा जा रहा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग उपस्थित रहे।

चार बैराज निर्माण से 2940 एकड़ भूमि होगी सिंचित यहां-यहां होगा निर्माण

मरकाढाना मैं दो करोड़ 25 लाख 12 हजार की लागत से बैराज बनेगा जिससे 230 हेक्टेयर,विसलदेही में तीन करोड़ नौ लाख 44 हजार रुपए की लागत से बैराज का निर्माण होगा जिसमें 355 हेक्टेयर,उमरी में दो करोड़ 27 लाख 54 हजार रुपए की लागत से बैराज निर्माण होगा जिससे 260 हेक्टेयर और छतरपुर पंचायत में 2 करोड़ 75 लाख नौ हजार की लागत से बैराज का निर्माण होगा जिससे 345 हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जा सकता है। 4 पंचायतों में 10 करोड़ 37 लाख 19 हजार की लागत से 1190 हेक्टेयर लगभग 2940 एकड़ क्षेत्र में किसान विभिन्न फसलों में सिंचाई का कार्य आसानी से कर सकता है।बैराज के निर्माण की अवधि एक साल निर्धारित की गई है यदि ग्रामीण क्षेत्र के लोग लोक निर्माण विभाग और इंजीनियर सहित ठेकेदार को सहयोग करें तो इसे बारिश के पहले निर्माण किया जा सकता है। इस निर्माण कार्य में दिन-रात कार्य होगा जिसकी निगरानी एक लोक निर्माण विभाग के डीएम रेंज के अधिकारी करेंगे।

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