इंदौर। कोरोना के दूसरे चरण में जहां ऑक्सीजनयुक्त और आईसीयू बेड्स की संख्या 7 हजार 650 थी, उसे बढ़ाकर 10 हजार 250 किया गया है। इनमें महिलाओं और बच्चों के आईसीयू युक्त बेड्स की संख्या भी पर्याप्त रखी गई है। जिले में पहली बार चार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को भी कोविड अस्पताल के रूप में परिवर्तित किया गया है। निजी क्षेत्र के 111 अस्पतालों में कुल 8 हजार 434 बेड्स की व्यवस्था की गई है। वहीं, शासकीय क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में एक हजार 816 बेड्स की व्यवस्था की गई है। पहले जहां शासकीय अस्पतालों में बेड की संख्या एक हजार 227 थी। वहीं, अशासकीय अस्पतालों में बेड्स की संख्या 6 हजार 423 थी। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए बनाए गए प्लान को कलेक्टर मनीष सिंह ने शनिवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान के सामने रखा।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को एआईसीटीएसएल के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में कोरोना के प्रबंधों की समीक्षा की। सीएम को यहां पर तीसरी लहर के लिए की गई तैयारियों की पूरी जानकारी दी गई। तैयारियों पर संतोष जताते हुए उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह की तैयारियां रहीं तो तीसरी लहर की चुनौतियों का सामना आसानी से कर लिया जाएगा। कलेक्टर मनीष सिंह ने उन्हें बताया कि ऑक्सीजन युक्त बेड की संख्या बढ़ाई गई है। कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पीसी सेठी अस्पताल को विशेष रूप से तैयार किया गया है।

पीसी सेठी अस्पताल में स्टाफ से की मुलाकात।
बैठक में बताया गया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर उनके लिए चार विशेष मातृ शिशु एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। कोरोना पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टर्स एवं नर्स को विशेष रूप से ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की गई है। ट्रेनिंग का काम शुरू हो गया है। प्रत्येक अस्पताल में एक-एक मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं। वह अपने-अपने अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सेस को ट्रेनिंग देंगे।
10 अगस्त तक सभी 42 ऑक्सीजन प्लांट होंगे चालू
बैठक में बताया गया कि जिले में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम तेज गति से चल रहा है। जिले में 52 करोड़ रुपए की लागत से 42 ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं। इनमें से 11 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हो गए हैं। शेष 31 ऑक्सीजन प्लांट भी जल्द ही तैयार हो जाएंगे। सभी ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण 15 अगस्त तक पूरा हो कर लिया जाएगा।

समीक्षा बैठक में इंदौर की तीसरी लहर से लड़ने की तैयारियों को देखा।
इंदौर में 76.77 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हुआ
समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि जिले में 28 लाख लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से अभी तक 21 लाख 55 हजार लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इस तरह 76.77 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हो गया है। टीकाकरण की शहरी क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्र में 70.41 प्रतिशत उपलब्धि रही है। जिले में महाअभियान के तहत 21 जून को सवा दो लाख लोगों का एक दिन में टीकाकरण कर रिकार्ड कायम किया गया। इंदौर जिला देश में अव्वल रहा। इंदौर जिले में टीकाकरण अभियान को सभी वर्गों के सहयोग से जन आंदोलन बनाया गया है। जिले में 16 स्थानों पर ड्राइव इन वैक्सीनेशन सेंटर बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए 7 स्थानों पर विशेष महिला टीकाकरण केन्द्र बनाया गया। दिव्यांगों के टीकाकरण के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई।

बेटियों का पूजन भी किया।
जनता ने खुद ही लगाए प्रतिबंध
बैठक में कलेक्टर ने बताया कि जिले में टीकाकरण के प्रति विशेष जागरूकता बढ़ी है। जिले में कई संगठन और संस्थाएं आगे आकर अपने-अपने क्षेत्रों में स्वप्रेरणा से प्रतिबंध लगा रहे हैं कि उनके यहां बगैर टीकाकरण के कोई प्रवेश नहीं करे। 40 से अधिक रहवासी संघों ने अपने यहां बिना वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। चोइथराम मंडी, निरंजनपुर मंडी, लक्ष्मीबाई अनाज मंडी, छावनी अनाज मंडी में भी बिना वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। सियागंज, क्लाथ मार्केट, 56 दुकान एसोसिएशन और समस्त औद्योगिक संगठनों द्वारा बिना वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र के प्रवेश पर 10 जुलाई के पश्चात प्रतिबंध लागू करने का निर्णय लिया गया है। विभिन्न संगठनों द्वारा “नो वैक्सीन-नो सैलरी एवं नो वैक्सीन- नो एंट्री” नियम लागू किया जा रहा है।
ब्लैक फंगस के मरीज हुए कम
बैठक में संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि संभाग में 80 ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं। उन्होंने ब्लैक फंगस से निपटने के प्रबंधों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के मरीज अब लगातार कम हो रहे हैं।
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