- वित्त मंत्रालय-आरबीआई को हुई शिकायत

सारनी। जिले के लोगों के भोलेपन का लाभ उठाकर निजि फॉयनेंस कंपनियां उपभोक्ताओं का जमकर शोषण कर रही है। ड्यू डेट पर EMI चुकाने वालों की किश्तों की इंट्री उनके ऋण खाते में विलंब से की जाती है जिसकी वजह से ग्राहकों की “सिबिल” रिपोर्ट खराब हो रही है। ऐसा ही एक मामला सुंदरम फॉयनेंस कंपनी का सामने आया है। सुंदरम के बैतूल शाखा प्रबंधक आशीष महाजन द्वारा की गई धोखाधड़ी की सप्रमाण शिकायत घोड़ाडोंगरी के उपभोक्ता विकास बत्रा द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को शिकायत पत्र भेजकर की गई है। गौरतलब है कि कोरोना लॉकडाउन में सरकार ने नागरिकों को मोरेटोरियम सहित अन्य कई सुविधाएं प्रदान कर आर्थिक संकट से बचाने की कोशिश की हो लेकिन इस समय भी निजि फॉयनेंस कंपनियां ग्राहकों से धोखाधड़ी कर जमकर शोषण कर रही है। घोड़ाडोंगरी निवासी विकास बत्रा ने बताया कि उनके द्वारा सुंदरम फॉयनेंस कंपनी से ढाई वर्ष पूर्व लिए गए वाहन ऋण की पूरी राशि प्रतिमाह नियत तिथि पर NEFT कर भुगतान कर दी जाती रही है। लेकिन यह राशि कंपनी की लापरवाही से कई-कई दिनों तक कंपनी के सस्पेंस एकाउंट में ही पड़ी रहती थी। उनके लोन एकाउंट लेजर में इंट्री नहीं होने पर जब वे बैतूल शाखा में फोन करते उसके बाद ही शाखा प्रबंधक द्वारा राशि को उनके लेजर में ट्रांसफर किया जाता था। लोन लेजर में EMI की इंट्री ड्यू डेट के बाद होने से उनका “सिबिल” स्कोर खराब होने लगा। ऐसा दर्जनों बार हुआ, जिसकी शिकायत शाखा प्रबंधक सहित कंपनी के उच्चाधिकारियों को ई मेल कर की गई लेकिन फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ। अपितु इसके बाद शाखा प्रबंधक आशीष महाजन द्वारा उन्हें जानबूझकर परेशान करना शुरू कर दिया गया। फोन करने के बाद भी वे समय पर लेजर में किश्त की इंट्री नहीं करते थे, और ना ही इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रयास करते थे। श्री बत्रा ने वित्त मंत्रालय और आरबीआई को भेजे गए शिकायत पत्र में उल्लेख किया है कि सुंदरम फॉयनेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक आशीष महाजन के रवैये से तंग आकर उन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान केंद्र सरकार द्वारा दी गई मोरेटोरियम सुविधा का विकल्प भी नहीं चुना और अपनी बची-खुची किश्तें भी समय पर NEFT कर चुकता कर दी। 17 जुलाई 2020 को पूरा ऋण चुका देने के बाद भी अब सुंदरम फॉयनेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक आशीष महाजन द्वारा पिछले दो माह से उनका नो-ड्यूज प्रमाणपत्र नहीं दी गया है और ना ही इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब दिया जा रहा है। ड्यू डेट पर अदा की गई किश्त की लेजर में लेट इंट्री करने की जिम्मेदारी लेने के बजाए इसकी पेनाल्टी ग्राहक के मत्थे ही मढ़ते हुए सुंदरम फॉयनेंस कंपनी द्वारा इंक्रीस और डिक्रीस टोटल स्टॉक रीविजन के नाम पर ग्राहक पर ही बैलेंस निकाल दिया है। इस पूरे मामले को लेकर कंपनी के उपभोक्ता विकास बत्रा ने वित्त मंत्रालय और आरबीआई का दरवाजा खटखटाया है।
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