सतपुड़ा स्क्रैप कांड में पहले हुआ निलंबन, अब तबादला अभियंताओं में मचा हड़कंप

Estimated read time 1 min read
  • सुरक्षा अधिकारी से लेकर संबधित अभियंता तक सभी पर हुई तबादले की कार्रवाई

सारनी। बहुचर्चित स्क्रैप कांड मामले रोज नए खुलासे हो रहे हैं जैसे जैसे खुलासे हो रहे हैं वैसे वैसे कार्रवाई का दायरा भी बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, मामले में नए मोड़ भी आ रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी की कार्रवाई से अभियंताओं में हड़कंप मचा हुआ है दरअसल स्क्रैप का वजन करने वाले तौल कांटे में सामने आई गड़बड़ी ने पॉवर हाउस सारनी प्रबंधन से लेकर मुख्यालय जबलपुर तक अधिकारियों को अचरज में डाल दिया। कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सभी यह सोच में पड़ गए हैं कि क्या ऐसा भी संभव है। गड़बड़ी सामने आते ही मुख्यालय जबलपुर से गठित 7 सदस्यी टीम द्वारा दो दिनों तक जांच की टीम के सारनी में रहते ही 4 बिजली कर्मियों को पॉवर हाउस प्रबंधन द्वारा सस्पेंड कर दिया गया वहीं सीएचपी के डीई त्रिपाठी को सीई ऑफिस अटैच कर दिया। इस कार्रवाई के अगले ही दिन यानी कि जांच टीम के मुख्यालय पहुँचते ही दो और अभियंताओं को सस्पेंड कर दिया गया रात होते तक खबर आई कि सुरक्षा अधिकारी वीके कनोजिया का सारनी से स्थानांतरण कर दिया गया  जबकि सारनी का कार्यभार एसके राघव को सौंप दिया गया। इसी तरह सस्पेंड किए गए सहायक अभियंता से लेकर सीएचपी के अभियंताओं को मध्यप्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी द्वारा अलग-अलग स्थानों पर तबादला कर दिया गया। यह आदेश पावर हाउस सारणी में पहुंचते ही अभियंताओं में हड़कंप मच गया।

ऐसे हुआ खुलासा
हमेशा की तरह इस बार भी प्लांट के स्क्रैप का टेंडर हुआ। जो कर्नाटक की भारत स्टील ट्रेडर्स कंपनी को मिला इस कंपनी ने बहुत ही कम दर पर काम लिया। इतनी कम दर पर काम लोकल के ठेकेदार भी नहीं कर पा रहे थे। टेंडर मिलते ही कंपनी द्वारा एक पखवाड़ा पहले काम शुरू किया। 21 मार्च को ट्रक क्रमांक-केए01-एएच 7710 में स्क्रैप लोड कर कांटे पर तौल हुआ। 6 चके ट्रक में स्क्रैप लोड कर जैसे ही 7 नंबर गेट पर लाया वैसे ही लोकल के ठेकेदार की ट्रक पर नजर पड़ी संदेह होने पर इसकी शिकायत बैतूल और सारनी थाने में कई गई। थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराई तो 16 टन के बजाय ट्रक में 29 टन भार निकल इसकी पुष्टि के लिए टीआई द्वारा पहले डब्ल्यूसीएल तौल कांटा, फिर प्राइवेट तौल कांटा पर वजन कराया। आखिरी में सीएचपी में भार कराया। यहां भी 29 टन ही भार निकला और इस तरह मामले का खुलासा हुआ।

स्क्रैप कांड में अब आया नया मोड़
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कर्नाटक की भारत स्टील ट्रेडर्स कंपनी को कम दर पर काम दिलाना फिर लोकल के ही व्यक्ति के जरिए हेराफेरी कराकर कंपनी को लाखों, करोड़ों की चपत लगाई जा रही थी। बहरहाल इस मामले में उक्त अधिकारी को कंपनी ने चलता कर दिया लेकिन इसके पीछे के मास्टर माइंड की भूमिका अभी भी संदेहास्पद है। अब देखना यह है कि पुलिस और पॉवर हाउस प्रबंधन कार्रवाई करती है या फिर अभयदान देकर मामले को रफादफा कर देगी। दरअसल इस स्क्रैप कांड में उक्त अधिकारी और व्यक्ति की सीधी एंट्री से नया मोड़ आ गया है।

इन्हें मिला है अभयदान
सतपुड़ा पावर प्लांट के कर्मचारी से लेकर मुख्य अभियंता तक, सभी का स्थानांतरण सामान्य प्रक्रिया के तहत होते रहता है। लेकिन पावर हाउस सारनी में ही एक ऐसे अधिकारी है  जिनका तबादला सारनी से कभी कहीं नहीं हुआ इन्हें मानों ऊर्जा विभाग का अभयदान प्राप्त हो। हालही में सामने आई गड़बड़ी के बाद कंपनी ने सीएचपी में पदस्थ सहायक अभियंता अभियंता तक सभी का तबादला कर दिया है पर अधीक्षण अभियंता एसएन सिंह पर इसकी आंच तक नहीं आई। इसकी वजह भी बताई जा रही है कि यह शख्स एमडी के ज्यादा करीबी है इसीलिए इनकी तरफ तबादला करने वालों से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक किसी की नजर नहीं जाती। जबकि कहा जा रहा है कि इन्होंने अपनी पूरी नौकरी सारनी में पदस्थ रहते ही कर ली इनके सामने ना जाने कितने चीफ इंजीनियर आए और चले गए पर इन पर कभी आंच नहीं आई। अब देखना यह है कि सीएचपी में हुए स्क्रैप कांड के बाद प्रमुख सचिव ऊर्जा इन्हें इसी जिम्मेदारी पर रखते हैं या इन्हें भी स्क्रैप कांड का इनाम तबादला कर देते हैं।स्क्रैप कांड के खुलासेमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले  झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक विधायक प्रतिनिधी रंजीत सिंह ने इस मामले में आरोप लगाया गया कि स्टोर के कर्मचारियों को तबादला करके बड़े-बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है। तोल काटा में कई वर्षों से वजन मे छेड़छाड़ किया जा रहा था  कोयला, चुरी और स्क्रेप कई गाड़ियां का वजन तोल काटा पर फर्जी वेट कर कंपनी को करोड़ों रु का चूना लगाया जा रहा है। जिसके शिकायत क्षेत्रीय विधायक से की गई है की कई अधिकारी जो वर्षो से जमे हुए है जो पेटी कांट्रेक्टर के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं ऐसे लोग पर भी कार्रवाई होना चाहिए। सुरक्षा अधिकारी का ट्रांसफर कर दिया गया लेकिन उनके अंडर में कार्य कर रहे हैं सुरक्षा कर्मचारी को अभी भी नहीं हटाया गया इससे साफ जाहिर होता है बड़े अधिकारी को बचाने का कार्य किया जा रहा है।कई अधिकारी जिन्होंने कंपनी को करोड़ों का रुपए का चूना लगने का कार्य कर रहे है   यह खेल कई वर्षों से चला रहा है इस खेल में जो मास्टरमाइंड है और पेटी कांट्रेक्टर इनकी जांच होनी चाहिए ऐसे अधिकारियों को भी यहां से हटाना चाहिए जो वर्षों से यहां जमे हुए हैं और जो जबलपुर के उच्चाधिकारियों को कृपा दृष्टि से जमे हुए ऐसी क्या वजह है इनका स्थानांतरण नहीं होता।

More From Author

+ There are no comments

Add yours