महाराणा प्रताप का स्वाभिमान हमारा अभिमान है: राघव

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  • वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की 489वीं जयंती पर उमड़ा जनसैलाब
  • क्षत्रिय महासभा राजपूत समाज अखंड भारत ने धूमधाम से मनाई जयंती

बैतूल/ सारनी । वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक महाराणा प्रताप जी की 489वीं जयंती क्षत्रिय महासभा राजपूत समाज अखंड भारत के तत्वावधान में बड़े ही भव्य एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में समाज के हजारों लोगों ने भाग लेकर महाराणा प्रताप जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर जगदीश सिंह राघव रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप केवल राजपूत समाज ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के गौरव हैं। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान की अद्भुत मिसाल है।
विशिष्ट अतिथियों में मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष नीतू सिंह परमार, प्रदेश अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ संगीता कुशवाह, वरिष्ठ समाजसेवी राजा ठाकुर केलेदार, राष्ट्रीय सचिव ठाकुर सिंह सोलंकी, भोजपुरी एकता मंच के जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह, कुनबी समाज सेवा संगठन अध्यक्ष मुन्ना मानकर, जिलाध्यक्ष हेमा सिंह चौहान, राकेश त्रिवेदी (संयोजक, सवर्ण समाज), अनिल पवार (पूर्व जिलाध्यक्ष पवार समाज), दीपक मालवी (हिंदू सेना), श्रीमती कुसुम केलेदार (नगर पालिका उपाध्यक्ष) तथा रामराव घाघरे (जिलाध्यक्ष पवार समाज) सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ संगठन मंत्री विनय सिंह चौहान द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से आशीष देशमुख, राजेंद्र वाघमारे, आशीष पवार, सतीश महते, गोल्डी विकास मिश्रा, गजेन्द्र पवार, संजय पाल, प्रदीप सिंह भारद्वाज, वीरेन्द्र सिंह गौर, गोलू सिंह ठाकुर, दिनेश सिंह ठाकुर, दौलत सिंह, मनोहर सिंह, डोमा महाजन, रोशन सिंह, राजा ठाकुर, रणजीत सिंह, तोप सिंह चौहान, रावण सिंह, कैलाश सिंह, बनवीर सिंह, रवि तोमर, गीतेश चौहान, मिथलेश सिंह, अनोप सिंह, शेर सिंह, अर्जुन सिंह, अर्चना भारद्वाज, नीलिमा राठौड़, सुजाता सिंह एवं रेखा भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में क्षत्रिय एवं क्षत्राणियाँ उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के अंत में महाराणा प्रताप जी के चित्र पर माल्यार्पण कर राष्ट्र एवं समाज की उन्नति के लिए प्रार्थना की गई। पूरे आयोजन में देशभक्ति, सामाजिक एकता और राजपूताना गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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