सारनी। केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर भारत सरकार के उद्योग विरोधी एवं मजदूर विरोधी फैसलों कोयला उद्योग का निजीकरण, कामर्शियल माइनिंग, निजी क्षेत्रों को कोल ब्लॉक आवंटन, सीएमपीडीआई को कोल इंडिया से अलग करने इत्यादि के खिलाफ 10 व 11 जून को दो दिवसीय देशव्यापी विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है। इसी कड़ी में सीटू यूनियन की वेकोलि स्तर की बैठक मीट एप्प के जरिए दिनांक 7 जून को संपन्न हुई। बैठक मेँ सीटू के महामंत्री अशोक बुंदेला उपस्थित रहे। बैठक में कोयला उद्योग का निजीकरण, कामर्शियल माइनिंग, निजी क्षेत्रों को कोल ब्लॉक आवंटन, सीएमपीडीआई को कोल इंडिया से अलग करने, श्रम कानूनों में संशोधन, ठेका मजदूरों को एचपीसी वेज भुगतान, 1-1- 2017 से ग्रेज्युटी 20 लाख रुपए का भुगतान, राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता 8 & 9 में वर्णित 9.3.0, 9.4.0, 9.5.0 के प्रावधानों को राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता 10 में भी लागू करने तथा आश्रितों को रोजगार शैक्षणिक योग्यता के अनुसार देने, कोविड-19 अवधि के दौरान सभी असंगठित श्रमिक बल को प्रतिमाह कम से कम 7500 रुपये उनके बैंक खाते में जमा करने, मनरेगा के तहत दोनों ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में 200 दिन के रोजगार सुनिश्चित करने तथा निर्धारित मजदूरी दर प्रतिदिन 500 रुपये करने इत्यादि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। तत्पश्चात भारत सरकार के उद्योग विरोधी एवं मजदूर विरोधी फैसलों के खिलाफ तथा 10 व 11 जून को पूरे वेकोलि में विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है। 10 जून 2020 को जुलूस, धरना, गेट मीटिंग एवं माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन को क्षेत्रीय महाप्रबंधक के समक्ष सौंपा जाएगा तथा 11 जून 2020 को काला दिवस मनाया जाएगा। जिसके तहत कोयला मजदूरों के द्वारा बिल्ला लगाकर ड्यूटी जाना, खदान द्वार (मुहाडे) पर खड़े होकर खदानों की निजी एजेंसियों को नीलामी के खिलाफ नारा लगाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस संबंध में मांग पत्र भी तैयार किया गया। सभी नेताओं ने कहा है कि भारत सरकार कोविड-19 की आड़ में मजदूर विरोधी, उद्योग विरोधी, पूंजीपतियों के हित में फैसले कर रहा है। यह सरकार देश के पब्लिक सेक्टर को तबाह करना चाहता है। यदि भारत सरकार कोयला खदानों की नीलामी रद्द नहीं करती है तो यह संपूर्ण कार्यक्रम आने वाले समय में बड़े संघर्ष हेतु एक जन जागरण हैं। इसके बाद बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी की जाएगी। हम भारत सरकार की मजदूर विरोधी मंसूबे का जमकर विरोध करेंगे।
भारत सरकार के उद्योग विरोधी एवं मजदूर विरोधी फैसलों के खिलाफ 10, 11 जून को विरोध दिवस के रूप में मनायेंगे श्रमिक संगठन
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