बैतूल। रक्त की कमी से रोजाना लोगों की जान चली जाती है। तमाम सामाजिक, धार्मिक व शिक्षण संस्थान लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बावजूद इसके रक्त की कमी पूरी नहीं हो पाती हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल में ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां दिव्यांगों का बीमारी के कारण एक ग्राम हीमोग्लोबिन हो जाने के कारण परिवार वाले चिंतित हो गए, रक्त समुह ए निगेटिव था ऐसे में ए निगेटिव रक्त के लिये पूरा परिवार परेशान था।समाजसेवियों के माध्यम से जब यह जानकारी रेलवे में कार्यरत नीरज बारस्कर को मिली तो उन्होंने 40 किलोमीटर दूर आमला से बैतूल जिला अस्पताल पहुंचकर रक्त की कमी से जूझ रहे दिव्यांग सतीश सोनारे को ए निगेटिव रक्त का दान कर उसकी जान बचाई। साथ ही रक्तमित्र सुभाष ने भी ए निगेटिव रक्तदान किया। कहते है परोपकार से बड़ा कोई दूसरा धर्म नहीं होता, जरूरतमंद को समय पर रक्त न मिले तो वह काल कवलित हो जाता है। ऐसी विपरीत परिस्थिति में नीरज बारस्कर और सुभाष ने मानव सेवा माधव सेवा का धर्म निभाया है। रक्त क्रांति टीम के शैलेन्द्र बिहारिया ने बताया कि पंकज उसरेठे ने भी मंगलवार को 35 वी बार रक्तदान किया है। रक्तदान के प्रति उनका हौसला देखकर उन्हें बधाई देते है। उन्होंने बताया नीरज ने इसके पूर्व भी रक्तदान शिविर के माध्यम से 211 यूनिट राक्तदान भगतसिंग जी के बलिदान दिवस पर करवाया था।
दिव्यांग के लिए 40 किमी दूर से बैतूल पहुंचकर किया निगेटिव ग्रुप का रक्तदान
Posted on by Vishal
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