- जीवन समस्या है तो कथा समाधान है: पं.सुखदेव शर्मा
- रामकथा में बुधवार वन गमन और केवट प्रेम की कथा सुनाई
बैतूल। श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति के तत्वाधान में रामलीला मैदान गंज में आयोजित राम कथा के पांचवें दिन अयोध्या कांड प्रारंभ हुआ। कथावाचक पंडित सुखदेव शर्मा ने कथा में बताया कि तुलसी जी श्री गुरु चरण की वंदना करते हैं। गुरुदेव के चरण रज मन रूपी दर्पण को साफ करती है। गुरु जगत से बचाकर जगदीश से जोड़ देते हैं। अयोध्या कांड में युद्ध की तैयारी है लेकिन युद्ध नहीं है, इसकी सीख देते हुए उन्होंने कहा बचपन में अगर किसी से मनमुटाव हो जाए उसे टाल दे, बचपन चंद्रमा की तरह होता है, जिसमें दाग नहीं होना चाहिए। शिवजी माथे पर चंद्रमा, गंगा धारण करते हैं। जवानी में माथा ठंडा रखो, कथा गंगा है यहां आओगे तो चिंता से मुक्ति मिलेगी। जीवन समस्या है तो कथा समाधान है, शिवजी सांप को गले में रखते हैं, बुराई है फिर भी प्रेम करो, न्यायाधीश परमात्मा है, वह तराजू लेकर सभी के पाप पुण्य का हिसाब रखते हैं। जब श्री राम विवाह करके आए नित्य नया आनंद होने लगा। राम कथा तो अपनी कथा है, जीवन वही है। वह त्रेता युग, यह कलयुग, उस समय लोग बिना खिले कपड़े पहनते थे, आज खिले हुए, पहले लोग खड़ाऊ पहनते, आज बूट पहनते, भीतर जीवन वही है जो पहले था। दशरथ जी के राज्य में दुख नहीं था लेकिन लगा रामराजा होते तो और सुख मिलेगा। आज जीव संतुष्ट नहीं है लेकिन और और के कारण जो पास है उसे भी गवा दिया, सुख होकर भी दुख ले लिया। एक रात में सब कुछ बदल गया। मंथरा ने बुद्धि का दुरुपयोग किया।
समाज में कई रूपों में घूम रही मंथरा
पंडित शर्मा ने जीवन उपयोगी सीख देते हुए कहा आपके पास राज्य, पद, संपत्ति, शान, भक्ति है, लेकिन दुरुपयोग मत करो। राम जी ने रावण को मार दिया यह कंफर्म है लेकिन मंथरा को मार दिए यह कंफर्म नहीं है। आज हर मोहल्ले घर घर में मंथरा कई-कई रूप में घूम रही है, आती जब है बहू के पास जब सांस नहीं होती, सास के पास जब बहू नहीं होती, इनसे बचना है। पंडित शर्मा ने कहा दीवाल में दरार पड़े तुरंत मसाला लगा लो, रिश्ते में दरार पड़े तो शंका जल्दी दूर कर लो नहीं तो तेज आंच में रोटी और शंका में रिश्ते जलते देर नहीं लगती। कैकई का अर्थ कई कई विचार है, मंथरा के कहने से कैकई ने संस्कृति के वस्त्र उतारकर विकृति के वस्त्र पहन लिए। जैसे सर्प के दो जीभ होती है कैकई कई के मन में भी दो वरदान है। जो राजा दशरथ से देवता घबराते वो आसक्ति स्त्री कैकई से घबराने लगे। लेकिन राजा दशरथ बात के धनी थे, आज बात कहते कुछ और करते कुछ। पिता की बात के कारण राम जी 14 वर्ष के लिए सब कुछ छोड़कर सीता जी, लक्ष्मण भैया के साथ वन चले गए। पंडित शर्मा ने बताया 5 कामेंद्रियां, पांच ज्ञानेंद्रियां, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार पर काबू पाएं तभी रावण मर सकता और राम राज्य आ सकता। संसार एक सपना है फर्क इतना सपने से जागे तो नींद खुलती है और संसार से जागे तो आंख बंद होती है। भक्ति सकाम एवं निष्काम होती है, निष्काम भक्ति के तट पर भक्त केवट खड़ा है। ब्रह्मा शिव जिनसे मांगते वह ब्रह्म केवट से मांगते हैं। नाव अर्थात सहारा संसार में सभी के प्रेम के सहारे की आवश्यकता है, उसी से पार हो सकते हैं। लेकिन पहले तीन प्रकार की हट होती थी राज हट, बाल हट, और नारी लेकिन एक हट और हो गई जिसका नाम है पद, पैसा, रूप, जवानी, जब यह जाती तो एक आती जिसका नाम घबराहट। तब केवल भगवान, गुरु, परिवार एवं हमारे संस्कार ही याद आते हैं। जहां वेद वेदांत देवता नहीं पहुंच सकते वहां पवित्र हृदय वाला प्रेमी पहुंच जाता है।–राम कथा में आज–श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति से मिली जानकारी के अनुसार राम कथा में आज कलकी कथा, भगवान का चित्रकूट निवास, दशरथ मरण, श्री राम भरत मिलन की कथा सुनाई जाएगी कथा का समय रात्रि 8 से 10 बजे तक निर्धारित है।
+ There are no comments
Add yours