ताप्ती स्नान के साथ भागवत कथा का समापन- देवकीनंदन ठाकुर ने मंदिर परिसर में किया पौधरोपण, अंतिम दिन विशाल भंडारा

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मुलताई। मुलताई में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को सातवें और अंतिम दिन था। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने दिन की शुरुआत मां ताप्ती नदी में स्नान कर की। उन्होंने विधि-विधान से स्नान के बाद मां ताप्ती का आशीर्वाद लिया और फिर मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में पंडित सौरभ जोशी ने देवकीनंदन ठाकुर को मां ताप्ती के धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुलताई को मां ताप्ती का उद्गम स्थल होने का गौरव प्राप्त है और यहां दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है। इसके बाद देवकीनंदन ठाकुर तपेश्वर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान शिव का अभिषेक एवं पूजन किया।

मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण का संदेश

धार्मिक कार्यक्रमों की इसी श्रृंखला में उन्होंने पटेल वार्ड में निर्माणाधीन एक शिव मंदिर का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। पौधारोपण के दौरान स्थानीय श्रद्धालु और आयोजन समिति के सदस्य भी मौजूद रहे। इन कार्यक्रमों के बाद देवकीनंदन ठाकुर कथा स्थल पर पहुंचे और श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस के प्रवचन प्रारंभ किए। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत रहा।

भक्तों में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया

पिछले छह दिनों की तरह शुक्रवार को भी हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। आयोजन समिति के अनुसार, कथा के समापन अवसर पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसमें लगभग पचास हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। नगर में पिछले एक हफ्ते से चल रहे इस धार्मिक आयोजन ने भक्तों में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया है। कथा के समापन के साथ ही श्रद्धालु देवकीनंदन ठाकुर के संदेशों और धार्मिक प्रेरणाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प ले रहे हैं।

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