धर्म को जानना ही नहीं मानना भी आवश्यक : धनराज धोटे प्रज्ञापुराण कथावाचक

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सारनी। स्थानीय गायत्री प्रज्ञापीठ में के वार्षिकोत्सव में शांतिकुंज हरिद्वार के नारायण रघुवंशी के साथ बैतूल जिले के विख्यात प्रज्ञापुराण  कथावाचक धनराज धोटे तथा तबला वादक मंचित गोहे एवं मालश धोटे की टोली द्वारा दीपमहायज्ञ का संचालन किया गया इस अवसर पर धनराज धोटे ने बताया कि भूख लगने पर धन नहीं भोजन की आवश्यकता होती है वैसे ही मनुष्य के पास सुख सुविधा के ढेरों साधन हैं किन्तु उसकी वास्तविक आवश्यकता सबुद्धि की है जिसके अभाव में सारी
मानव जाति संकटग्रस्त एवं दुखी है जिसने समय की जरूरत को देखते हुए आत्मकल्याण, राष्ट्रकल्याण व समाजकल्याण के लिए कार्य किया है वही विश्वविजेता होता है।उन्होंने बताया कि अपनी आत्मा स्वयं जानती है क्या धर्म और क्या अधर्म है पर धर्म को केवल जानने ही नहीं मानने की आवश्यकता है। मंच पर उपस्थित उपजोन प्रभारी दीपक मालवीय ने दीपयज्ञ के दौरान हरिद्वार महाकुंभ की दृष्टि से शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा प्रारंभ किये जा रहे नवीन अभियान आपके द्वार पहुंचा हरिद्वार “हर हर गंगे-घर घर गंगे” अभियान के विषय में सारगर्भित जानकारी दी तथा सारनी
नगर के प्रज्ञा परिजनों से आसपास के 24 गाँवों में जाकर रहवासियों से सम्पर्क कर इस अभियान से जोड़ने व लाभान्वित करने का आग्रह किया। कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित कर गायत्री मंत्र के साथ भगवान महाकाल को भी आहुतियाँ समर्पित की गई।

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