बैतूल। दसवीं क्लास की छात्रा खुशी सरियाम ने सैनिटरी पैड की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए और समाज में स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने के लिए बेहतरीन प्रयास शुरू किया है। फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने जिस प्रकार अपनी फिल्म पैडमैन में महिलाओं और बच्चियों को बीमारियों से बचाने व स्वच्छता के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से फिल्म में पैडमैन की भूमिका निभाई थी उसके ठीक विपरीत खुशी वास्तविक जीवन में गरीब और बेबस महिलाओं व लड़कियों के लिए सहारा बन गई हैं। खुशी गरीब महिलाओं व बच्चियों को सेनेटरी पैड बांटती हैं। बता दें कि खुशी 2 वर्षों से निशुल्क सेनेटरी पैड बांटने का कार्य कर रही है। वहीं महिलाओं और बच्चियों को इसके इस्तेमाल और ज़रूरत के लिए जागरूक भी कर रही हैं। खुशी ने गुरुवार जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले ग्राम जसोन्दी की महिलाओं एवं बच्चियों को सेनेटरी पैड का वितरण कर इसके प्रति जागरूक किया। इस दौरान कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा गया।–पिता के कार्यों से मिली प्रेरणा–उल्लेखनीय की खुशी शिक्षक व वरिष्ठ समाजसेवी राजेश सरियाम की सुपुत्री है। पिता के समाज सेवा के कार्यों से प्रेरणा लेकर खुशी इस क्षेत्र में कार्य कर रही है। जैसा नाम वैसा ही काम करते हुए खुशी गरीब महिलाओं एवं बच्चियों को सेनेटरी पैड वितरित कर उनके चेहरे पर खुशी लाने का प्रयास कर रही है। खुशी का कहना है कि वह सेनेटरी पैड के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए ऐसा कर रही हैं।
बच्चियों के प्रति सहानुभूति जरूरी
कम उम्र में सामाजिक गतिविधियों में शामिल होकर समाज हित में काम करना खुशी का सपना है। खुशी का मानना है कि बच्चियों को इस दौरान कई विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। शारीरिक पीड़ा सहन करनी पड़ती है, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में परिवार के सदस्यों को बच्चियों के प्रति सहानुभूति रखना चाहिए ऐसे वक्त उन्हें खुश रखना चाहिए। ग्राम जसोन्दी की सैकड़ों बच्चियों को उपयोग करने की सलाह देने के साथ-साथ शारीरिक विकास से संबंधित जानकारी भी दी। इस अवसर पर हायर सेकेंडरी कोलगांव के प्राचार्य डीके काले ने खुशी के इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा की और छात्राओं का हौसला बढ़ाया। खुशी ने बताया भविष्य में जरूरतमंद बच्चियों के लिए सेनेटरी पैड निशुल्क उपलब्ध करना प्रथम प्राथमिकता रहेगी, खुशी कहती है कि मैं हमेशा अपनी कमाई का कुछ हिस्सा बच्चियों के लिए रखूंगी। ग्रामीणों ने आदिवासी पैड बेटी खुशी के इस कार्य की सराहना करते हुए उज्जवल भविष्य की कामना कर आशीर्वाद दिया।
मासिक धर्म को लेकर समाज में फैली कई भ्रांतियां
इस संबंध में राजेश सरियाम का कहना है भारत में खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और किशोर बालिकाओं के बीच मासिक धर्म को लेकर कई सारी भ्रांतियां और समस्याएं हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक 12 प्रतिशत महिलाएं ही सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं। ये प्राकृतिक प्रक्रिया अपने साथ कई सारी समस्याएं भी लेकर आती है। मासिक धर्म के दौरान अगर सही से रखरखाव और साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो कई तरह की गंभीर समस्याएं जन्म ले सकती हैं। ग्रामीण इलाकों में पानी, साफ सफाई, शौचालय और सही जानकारी न होने की वजह से महिलाओं में कई गंभीर बीमारियां भी हो जाती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सबसे सही उपाय यह होता है कि जागरूकता बढ़ाई जाए और सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल किया जाए। लेकिन हमारे समाज में इसके बारे में बात ही नहीं की जाती। जिससे यह एक प्रकार की भ्रांति बनकर रह जाती है।
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