कोरोना से उबारने के लिए आ सकता है 1.5 लाख करोड़ का पैकेज, 10 करोड़ के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करने पर विचार

Estimated read time 1 min read

नई दिल्ली। देश इस वक्त कोरोना वायरस के कारण मुश्किल दौर से गुजर रहा है। इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों की तरफ से कई पहल की गई है। लेकिन, आर्थिक मोर्चे पर नरेंद्र मोदी सरकार इसको लेकर बड़ा कदम उठा सकती है।

समाचार एजेंसी रायटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कोरोना वायरस के कारण भारत सरकार 1.5 ट्रिलियन रुपए (19.6 बिलियन डॉलर) का प्रोत्साहन पैकेज दे सकती है। हालांकि, सरकार ने अभी तक पैकेज फाइनल नहीं किया है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ऑफि इंडिया के बीच बातचीत जारी है।

रायटर्स ने एक सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि प्रोत्साहन पैकेज करब 2.3 ट्रिलियन रुपए का हो सकता है, लेकिन इस पर अभी चर्चा की जा रही है। पैकेज का ऐलान इस हफ्ते के आखिर तक किया जा सकता है और उन पैसों को सीधे 100 मिलियन गरीबों के बैंक एकाउंट्स में भेजा जाएगा और लॉकडाउन से प्रभावित व्यवसायियों की मदद के लिए दिया जाएगा।

सरकार एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए उधार लेने की राशि को भी बढ़ा सकती है, जो वर्तमान में औसत उधार योजना 7.8 ट्रिलियन रुपए की है। रायटर्स ने आगे बताया ह कि सरकार ने केन्द्रीय बैंक से कहा कि वे जारी किए जा रहे सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदे। यह सरकार का एक ऐसा कदम है जिसे कई दशकों से भारतीय केन्द्रीय बैंक की तरफ से महंगाई बढ़ने के चलते नहीं उठाया गया है।

भारत में कोरोना को लेकर काफी संकट की स्थिति बनी हुई है। पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया है। देश में अब तक कोरोना के 605 मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि 10 लोगों की मौत हो गई है। सरकार 1 अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए उधार लेने की राशि को भी बढ़ा सकती है, जो वर्तमान में औसत उधार योजना 7.8 ट्रिलियन रुपये की है।

रायटर्स ने आगे बताया ह कि सरकार ने केन्द्रीय बैंक से कहा कि वे जारी किए जा रहे सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदे। यह सरकार का एक ऐसा कदम है जिसे कई दशकों से भारतीय केन्द्रीय बैंक की तरफ से महंगाई बढ़ने के चलते नहीं उठाया गया है।

अधिकारी ने बताया कि विश्व के अन्य केन्द्रीय बैंकों की तरह आरबीआई को को भी बॉण्ड खरीदना होगा। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सरकार केन्द्रीय बैंक के वेज-एंड-मिन्स सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकती है, जिसमें आरबीआई की तरफ से पैसे की किल्लत वाले राज्यों को पैसे का ऑफर किया जा सकता है।

More From Author

+ There are no comments

Add yours