आवरिया-ठानी होते हुए सारणी मार्ग बनाने की मांग

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  • 20 की जगह 30 किमी को फेरा लगाकर ग्रामीण पहुंच रहे सारणी

आमला। आवरिया-ठानी होते हुए सारणी मार्ग कच्चा है। इसी वजह से ग्रामीणों को सारणी आने-जाने के लिए 15 किमी के इस रास्ते को तय करने के लिए 30 किमी का फेरा लगाना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों का समय और धन दोनों बर्बाद हो रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि आमला से आवरिया, ठानी होते हुए सारणी महल 20 किलोमीटर है। लेकिन ग्रामीणों को आमला से बोरी होते हुए 30 किलोमीटर चलकर सारणी आना-जाना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने इस मार्ग के निर्माण को लेकर जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई सालों से मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो सकी है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण कच्चा और पथरीला मार्ग पक्का नहीं बना है। लोगों को रात में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि यह सडक बनती है, आमला सारणी के साथ-साथ सीधे छिंदवाड़ा से भी जुड जायेगा। मार्ग बनने से किसानों को भी फायदा मिलेगा। किसान आसानी से अपनी उपज लेकर सारनी तक पहुंच पाएंगे। वहीं सब्जियां बेचने वाले किसानों को भी लाभ मिलेगा। अभी वर्तमान में किसानों को लंबा फेरा लगाकर आना-जाना पड़ रहा है। इससे उन्हें अधिक समय भी लग रहा है। धन भी ज्यादा खर्च हो रहा।

बरसात में मुश्किल हो जाता है आना-जाना

रास्ता खराब होने के कारण बरसात में काफी परेशानी होती है। ठंड और गर्मी का मौसम तो वह जैसे-तैसे उबड़-खाबड़ और खराब रास्ते पर चलकर निकाल लेते है, लेकिन बरसात के समय कच्चा मार्ग बेहद खराब हो जाता है। जिस पर बाइक चलाना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या ग्रामीण पिछले कई सालों से झेल रहे हैं। जबकि इस मार्ग के निर्माण से कई गांवों का विकास तेजी से होगा। ग्रामीणों ने बताया कि मार्ग निर्माण को लेकर पहले भी कई बार आश्वासन मिला था, लेकिन आश्वासनों पर कभी अमल नहीं हुआ। सडक नहीं बनने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिससे लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

(1) वर्षो से आमला नगर उपेक्षा का शिकार हुआ है। यहां न तो स्वास्थ की कोई अच्छी व्यवस्था है न तो रोजगार के उचित संसाधन मौजूद है। सडक़ों का पक्कीकरण नहीं होने से व्यापार भी प्रभावित होता है। आवरिया-ठानी होते हुए सारणी मार्ग बनता है तो आमला सीधे सारणी और छिंदवाड़ा से जुड जायेगा। जिससे आमला का व्यापार बढ़ेगा।

-राजेश वट्टी, संभागीय अध्यक्ष, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी आमला

(2) आमला शहर से सारणी के लिए आज तक कोई अच्छी सडक़ नही हो पाई है। वर्षो पहले सडक तो बनाई गई, लेकिन राजनीतिक लोगों के दवाब के कारण सडक़ बोरी होते हुए पहाड़ी इलाके की ओर से बनाई गई। जिस पर सिर्फ दोपहिया वाहनों से ही आवाजही हो रही है। चोपहिया वाहनों या बस, लगेज वाहन, ट्रक इस सडक़ पर नही चल पाते है।

– अनिल उइके, जिला अध्यक्ष, भारत आदिवासी पार्टी बैतुल

(3) आमला से ग्राम आवरिया ठानी होते हुए सडक़ बनती है तो यह मार्ग से बेलोंड पर मिलेगा। जिससे सारणी की दूरी महज 20 किमी हो जाएगी और सफर भी आसन होगा। बस, ट्रक, बड़े वाहन आसानी से संचालित होगे। इस मार्ग पर कोई घाट पहाडी भी नही है, जबकि बोरी होते सारणी सडक जानलेवा है। हजारों फिट गहरी खाई दोनो ओर है और हर वर्ष पहाडी खस रही है। जिससे भविष्य में सडक धंसक सकती है।

-कमलेश अतुलकर, ब्लाक अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी

(4) पूर्व में भी आवरिया-ठानी मार्ग का सर्वें किया गया था, लेकिन राजनीतिक समीकरणों के कारण बोरी होते हुए सडक निर्माण डायवर्ड हो गया। अगर आवरिया होते हुए सडक़ स्वीकृत की जाती है तो रोजाना सारणी के लोगो के छिंदवाड़ा, नागपुर के लिए ट्रेन से सफर करने आमला रेलवे स्टेशन आ पाएगे। सारणी से व्यापारिक गतिविधिया संचालित होने से शहर में व्यापार भी बढ़ेगा।

– यसवंत हुडे ब्लाक अध्यक्ष युवक कांग्रेस आमला

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