स्कूल के प्यारे दोस्त : 26 साल बाद मिले स्कूल के दोस्त तो खुशी के आंसू छलक उठे

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सारनी। यह आलम था सारणी इरेक्टर हॉस्टल का जब 1998 में पढ़े दसवीं के छात्र-छात्राएं आपस में मिले तो खुशी के आंसू छलक उठे सभी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था और सारे दोस्त खुशी से झूम रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ सारणी के ईरेक्टर हॉस्टल में किया गया जहां ग्रुप में सम्मिलित 13 मित्रों में दो मित्रों की हृदय गति रुकने से मृत्यु हो जाने के कारण सभी मित्रों ने 2 मिनट का मौन धारण कर उन्हे श्रद्धांजली अर्पित की जिसमें राजेश नागले और ललिता पाटील जिनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई इनको याद किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कर दिनभर कार्यक्रम किया गया आउटडोर कार्यक्रम रखा गया जिसमें की सारणी डेम और ख़ैरवानी के नदी के घाट में जाकर मित्रों ने खूब मस्ती की और खूब इंजॉय किया और शाम को सभी मित्र बाबा मठारदेव के शिखर पर सम्मिलित होकर हायर सेकेंडरी स्कूल से होते हुए शाम को रेस्टोरेंट में एक दूसरे से विदाई ली गई। और दिसंबर में ऐसा ही एक और कार्यक्रम करेंगे सभी लोगो ने सहमति जताई।
जब सभी लोग अपने-अपने घरों की ओर प्रस्थान कर रहे थे तो सब की आंखों से आंसू छलक उठे और गमगीन माहौल हो गया। 26 वर्ष बाद मिले मित्रों ने कौन कहां-कहां रहता है और क्या-क्या करता है यह एक दूसरे को विचार साझा किया।इसमें प्रमुख रुप से समल्लित मित्र थे सतीश बौरासी ,रंजीत डोंगरे, राकेश नामदेव विकास राय, मिनाज खान, श्वेता राजपूत,ममता झरबडे प्रतिभा महाजन, बबीता भूमरकर ,प्रतिभा डेहरिया , किरण ,आदि मित्र गण उपस्थित थे।

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