गुरु पूर्णिमा पर रुचक योग, भद्र योग, हंस योग, मालव्य योग, शश योग, जैसे कई ग्रहों का शुभ संयोग, कई राशि वालों को मिलेंगे बेहतर परिणाम पंडित अमित शर्मा

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आमला। सनातन (हिन्दू) पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाती है। गुरु पूर्णिमा को  वेदव्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि पर भगवान अपने आराध्य  गुरु की पूजा होता है ।पंडित अमित शर्मा जी ने बताया की  पौराणिक और महान साहित्य की रचना करने वाले महर्षि वेद व्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा तिथि पर हुआ था,हर वर्ष इस तिथि को गुरु पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है। इस दिन गुरु और अपने इष्टदेव की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह दिन सबसे उपयुक्त दिन माना गया है। वैसे तो गुरु के  लिए हर दिन ही उपयुक्त है क्योंकि हमारे जीवन में गुरु की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है. पंडित अमित शर्मा ने बताया की माता और पिता के अलावा, गुरु बच्चे के पालन-पोषण और जीवन को आकार देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. खासतौर पर भारत में, गुरु को ऐसे व्यक्ति के रूप में सम्मानित किया जाता है जो न केवल शिक्षा प्रदान करते हैं बल्कि अपने शिष्यों में मूल्यों को भी विकसित करता है और जीवन के जरूरी सबक सिखाते हैं. इसलिए, उन लोगों को सम्मानित करने के लिए समर्पित एक दिन है जिनका आशीर्वाद हमें ज्ञान, शिक्षा या कौशल के रूप में मिलता है. इस दिन को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है
इस बार गुरु पूर्णिमा 13 जुलाई को है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार गुरु पूर्णिमा पर कई ग्रहों का शुभ राजयोग बन रहा है। खास बात है कि इस तिथि पर सूर्य, बुध और शुक्र का शुभ संयोग बहुत ही लाभ प्रदान करने वाला है गुरु पूर्णिमा पर सभी ग्रहों के राजा  सूर्यदेव मिथुन राशि में हैं जहां पर ये बुध के साथ युति बनाए हुए हैं। सूर्य और बुध के एक राशि में होने पर बुधादित्य योग बनता है और मंगल ग्रह अपनी स्वयं की राशि मेष में विराजमान है। जिसके कारण गुरु पूर्णिमा के दिन रुचक योग का निर्माण हो रहा है मंगलदेव- ग्रहों के सेनापति और मंगल ग्रह अपनी स्वयं की राशि मेष में विराजमान है।
बुध ग्रह का संयोग- गुरु पूर्णिमा यानी 13 जुलाई को बुध ग्रह स्वयं की राशि मिथुन में यात्रा करते हुए भद्र योग का निर्माण कर रहे हैं। यह योग बहुत ही शुभ माना गया है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु ग्रह का संयोग- देवगुरु बृहस्पति सभी ग्रहों में सबसे शुभ फल देने वाले ग्रह होते हैं। गुरु ग्रह स्वयं की राशि में मीन में विराजमान होते हुए हंस योग का निर्माण कर रहे हैं शुक्र ग्रह- सुख,वैभव और ऐशोआराम प्रदान करने वाले ग्रह शुक्र स्वयं की राशि वृषभ में विराजमान रहते हुए मालव्य योग बना रहे हैं शनि ग्रह- शनि ग्रह 12 जुलाई को कुंभ राशि से निकलकर अपनी राशि मकर में गोचर करेंगे जिसके चलते शश योग बन रहा है।
गुरु पूर्णिमा पर वर्षों बाद ऐसा संयोग ज्योतिष शास्त्र के अनुसर से देखें तो मौजूदा समय में सूर्य को छोड़कर सभी ग्रह अपनी स्वयं की राशि में गोचर कर रहे हैं। वहीं सूर्य और बुध के मिथुन राशि में होने पर बुधादित्य योग बन रहा है। गुरु पूर्णिमा पर इस तरह का संयोग वर्षों के बाद बन रहा है। ऐसे में इस बार गुरु पूर्णिमा बहुत ही फलदायी होने वाली होगी। इसके अलावा 13 जुलाई को शुक्र ग्रह मिथुन राशि में सुबह करीब 11 बजे गोचर करेंगे। इस तरह से गुरू पूर्णिमा के दिन सूर्य, बुध और शुक्र ग्रह एक ही राशि में रहते हुए त्रिग्रही योग का भी निर्माण होगा।
इन तीन राशि वालों के लिए गुरु पूर्णिमा बहुत ही शुभ रहेगी
मिथुन, वृषभ और धनु राशि वालों के लिए गुरु पूर्णिमा पर होगा भाग्योदयभाग्य का अच्छा साथ मिलेगानौकरी में अच्छे मौके प्राप्त होंगे कार्यक्षेत्र में मान सम्मान बढ़ेगा सुख सुविधाओं  में बढ़ोतरी होगी जीवन में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। व्यापार में अच्छा खासा मुनाफा प्राप्त होगा  गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रमा धनु और सूर्य मिथुन राशि में रहेंगे।

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