बैतूल। वीरांगना रानी दुर्गावती की पुण्यतिथी भाजपा जिला कार्यालय विजय भवन में उनके छायाचित्र पर श्रद्वासुमन अर्पित कर मनाई गई। सांसद दुर्गादास उइके ने कहा कि रानी दुर्गावती ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणो का बलिदान दिया। कालिजर के राजा कीरतसिंह की पुत्री और गोंड राजा दलपतषाह की पत्नी थी दुर्गावती। उन्होने पति की मृत्यु के बाद राज्य की बागडोर संभाली और उनके युद्व लडे। वे कुषल शासिका थी। पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि राष्ट्र धर्म के लिए प्राणो को न्यौछावर करने वाली रानी दुर्गावती का जीवन प्रेरणादायी है। रानी दुर्गावती ने 1550 से 1564 ईसवीं तक सफलता पूर्वक शासन किया। उन्होने अपने कार्यकाल मे कई मंदिर इमारते और तालाब बनवाएं। इनमें सबसे प्रमुख जबलपुर का रानीताल जो रानी दुर्गावती के नाम पर बनवाया था। जिलाध्यक्ष आदित्य बबला शुक्ला ने रानी दुर्गावती के जीवन पर प्रकाष डालते हुए कहा कि रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टुबर 1524 को कलिराज के राजघराने में हुआ था और विवाह मध्यप्रदेष के गांेडराजा दलपतषाह के साथ हुआ था। पति की असमय मृत्यु के पश्चात रानी ने अपने नाबालिग पुत्र वीरनारायण को राजा घोषित कर राज्य की बागडोर संभाली। उन्होने इस दौरान मुगलो के साथ अनेक युद्व लडे। मुगल सेना से युद्व लडते हुए रानी दुर्गावती ने 24 जुन 1564 ईसवीं को अपना बलिदान मातृभूमि की रक्षा करते हुए दे दिया। इस दौरान प्रदेष कार्यसमिति सदस्य अलकेष आर्य, पूर्व जिलाध्यक्ष बसंत बाबा माकोडे, पूर्व विधायक महेन्द्रसिंह चौहान, रंजीत सिंह, अबिजर हुसैन, डा.महेन्द्रसिंह चौहान, केसरी यादव, गीतेष बारस्कर, पवन यादव, अंषुल राजपुत इत्यादि उपस्थित थे।
श्रद्वासुमन अर्पित कर मनाई रानी दुर्गावती की पुण्यतिथी
Posted on by Vishal
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