कांग्रेस ने सत्ता के अहंकार में लगाया था आपातकाल आदित्य बबला शुक्ला

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बैतूल। आपातकाल और मीसाबंदी वर्ष1975 की 25 जून की वो काली रात जब भारतीय लोकतंत्र को सूली पर चढ़ाकर देश में आपातकाल लगाया गया जिससे भूल पाना किसी भारतीय के लिए संभव नही। भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री  इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून की रात तमाम संवैधानिक संस्थाओं और आम भारतीय नागरिकों के अधिकारों को समाप्त कर दिये साथ ही सरकार के गैर संवैधानिक कार्यों की आलोचना को भी गैर कानूनी बना दिया गया और सरकार की नीतियों कि आलोचना भी गंभीर अपराध हो गई जिस के  आधार पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण सहित विपक्ष के तमाम नेताओं को जेल में डाल दिया गया पूरे देश में आपात काल के खिलाफ आक्रोश था । इस काले कानून के विरोध में जेल जाने वालों में तब के जनसंघ और आज के भारतीय जनता पार्टी के नेता सबसे आगे रहे श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई,  लालकृष्ण आडवाणी, हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित बैतूल जिले के लोग भी पिछे नही रहे पूर्व सांसद सुभाष आहूजा,  रामचरित मिश्रा, और मोती लाल कुशवाहा बैतूल से तो सूर्यपुत्री मां ताप्ती की नगरी से एन लाल जैन, वकील एमएन भार्गव, आम्बेकर जी,मान्डले जी के साथ कई नेताओं ने जेल जाने में तनिक भी संकोच नही किया।  क्या था मीसा कानून? सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम  सन १९७१ में भारतीय संसद द्वारा पारित एक विवादास्पद कानून सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम के तहत। बज मीसा लाया गया था। इसमें कानून व्यवस्था बनाये रखने वाली संस्थाओं को बहुत अधिक अधिकार दे दिये गये थे। आपातकाल के दौरान (1975-1977) इसमें कई संशोधन हुए और कांग्रेस ने अपने राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को राजनीतिक द्वेष से बन्दियों बनाया गया। ‘कांग्रेस ने सत्ता के अहंकार में लगाया था आपातकाल‘ देश के नागरिकों को कतई नही भा रहा था राष्ट्र नायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व पूरे देश मे आपातकाल के खिलाफ जन संघर्ष बढ़ने लगा ‘‘जन संघर्ष के बाद हठाना मजबूरन इंदिरा गांधी को देश से आपातकाल हटा कर चुनाव कराने पर मजबूर होना पड़ा पूरे देश में आम चुनाव हुवे और अन्ततः 1977 में इंदिरा गांधी की पराजय के बाद  जनता पार्टी की सरकार आई और लोकतंत्र की बहाली हुई। इंदिरा सरकार ने आखीर क्यों लगाया आपातकाल इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के रायबरेली से लोकसभा के लिए निर्वाचन रद्द कर दिया गया, सत्ता को लोलुप्ता और सत्ता हाथ से जाने का दुख और भ्रष्टाचारों के कारण जेल जाने का भय था बहरलाल अपनी सत्ता को किसी भी तरह बचाए रखने के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा आनन-फानन में देश के ऊपर आपातकाल थोप दिया गया और उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को जेल में डालने तथा दमन का वो काला अध्याय प्रारम्भ हुआ जिसे कोई भी भारतीय कभी नही भूल सकता है,लेकिन लोकतंत्र के सजग प्रहरियों जिनको आज हम मीसाबंदी के नाम से जानते हैं उनके देश पर मर मिटने की जज्बे के कारण अंततः 1977 में आपातकाल समाप्त कर चुनाव करवाया गया जिसमे इंदिरा गांधी सहीत कांग्रेस पार्टी बुरी तरह से परास्त हुई। फल स्वरुप श्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी और और देश पुनः लोकतंत्र के साए में आगे बढ़ चला।

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