सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड पाथाखेड़ा की तवा दो खदान में 59 वर्षयी रामचरण पिता चेतिया की मौत बुधवार को होने के बाद नागपुर मुख्यालय से डीजीएमएस का प्रतिनिधिमंडल पाथाखेड़ा पहुंचकर घटना स्थल वाले खदान के निरीक्षण कार्य में जुट गए हैं। हालांकि भूमिगत खदानों में काम करने वाले मजदूरों के पक्ष में हमेशा आवाज उठाने वाले श्रमिक संगठनों को भी यह पता है कि प्रबंधन की लापरवाही की वजह से यह घटना हुई है लेकिन श्रमिक संगठन के पदाधिकारी भी इस मामले में खुलकर बोलने को तैयार नहीं है ऐसी स्थिति में नागपुर से आए डीजीएमएस के जांच पर भी ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता है। कई जानकार कर्मचारियों का कहना है कि जिस स्थान पर रामचरण सेफ्टी में लगे बिल्लियों को हटाने का कार्य कर रहा था। वह बल्ली को एलएसडी मशीन से खींचने का कार्य किया जाना चाहिए था जिससे इस तरह की घटना नहीं हो सकती। लेकिन कार्यस्थल पर लंबे समय से जिम्मेदार अधिकारी के न पहुंचने के कारण ही यह घटना होना बताया जा रहा है। डब्ल्यूसीएल पाथाखेड़ा के कई जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को छुपाने और कार्य में मजदूर की लापरवाही को दर्शाने में जुटे हुए हैं जिससे कर्मचारियों में आक्रोश का माहौल बनता दिखाई दे रहा है।
ज्यादा प्रोडक्शन की वजह से हो रही है दुर्घटनाएं
वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड पाथाखेड़ा की भूमिगत खदान लगातार बंद होती जा रही है। ऐसे में डब्ल्यूसीएल प्रबंधन पाथाखेड़ा पर कम खदानों से ज्यादा कोयला खनन करने का दबाव बना हुआ है और इस लक्ष्य को पूरा न कर पाने के कारण डब्ल्यूसीएल प्रबंधन कम समय में ज्यादा कोयला खनन करने का दबाव भूमिगत खदानों में काम करने वाले मजदूरों पर डाल रहे हैं। जिसकी वजह से यह घटना होना बताया जा रहा है। हालांकि डब्ल्यूसीएल प्रबंधन हमेशा से ही भूमिगत खदानों में हुए एक्सीडेंट ओं में मजदूर की ही गलती को बताने का कार्य करते हैं।
महाप्रबंधक को लिखा पत्र
राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ इंटक के संगठन मंत्री राजेश सिन्हा ने महाप्रबंधक को पत्र लिखकर तवा दो खदान में 19 मई को हुई दुर्घटना की विभागीय एवं डीजीएमएस की जांच में संघ के प्रतिनिधि को शामिल करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा की कोयला कर्मचारी की मौत का विभागीय जांच एवं डीजीएमएस की जांच प्रक्रिया में अन्य श्रमिक संगठन के प्रतिनिधित्व के साथ-साथ राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ इंटक का प्रतिनिधित्व भी रखना जरूरी है। इसमें मजदूर की मौत कैसे हुई यह प्रबंधन ना छुपा पाए एक वर्ष के बाद भूमिगत खदानों गंभीर दुर्घटना होने से एक कर्मचारी की मौत होने पर प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है वैसे ही इस वर्ष पाथाखेड़ा क्षेत्र की शोभापुर खदान और सारनी माइंस के बंद हो जाने के कारण कोयले के उत्पादन पर भी विपरीत असर पड़ रहा है और उस विपरीत असर को डब्ल्यूसीएल प्रबंधन के द्वारा कम समय में ज्यादा कोयला खनन करने के उद्देश्य से ही दुर्घटनाओं को खुले रूप से आमंत्रित कर रही है।
इनका कहना है
प्रबंधन की लापरवाही की वजह से एक श्रमिक की मौत हो गई है। जिम्मेदार अधिकारी यदि घटनास्थल पर उपस्थित रहे थे तो कर्मचारी की मौत नहीं होती,हालांकि मामले की जांच के लिए नागपुर से डीजीएमएस घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए पहुंच चुके हैं।
विजेंद्र सिंह महामंत्री बीएमएस यूनियन पाथाखेड़ा
घटना स्थल पर डीजीएम्एस के अलावा इंटरनल सेफ्टी आर्गेनाइजेशन के लोग भूमिगत खदान में पहुंचकर दुर्घटना कैसे हुई और इसमें किसकी लापरवाही है घटनास्थल पर कौन कौन जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित थे या नहीं इसकी जांच में जुटे हुए हैं।
भरत सिंह महामंत्री इंटक यूनियन पाथाखेड़ा
कम समय में ज्यादा प्रोडक्शन करने की वजह से मानव चूक होती है और बुधवार को जो घटना हुई है वह दुखद है इस तरह की दुर्घटना दोबारा ना हो इसका ध्यान प्रबंधन और खान प्रबंधक को रखना चाहिए।
अशोक नामदेव महामंत्री कोयला श्रमिक सभा (एचएमएस)
कार्य पद्धति में लापरवाही होने की वजह से ही तवा-दो खदान में यह दुर्घटना हुई जिससे कर्मचारी की मौत हुई है। इस मामले की जांच के लिए नागपुर मुख्यालय से अधिकारी भी पाथाखेड़ा पहुंच गए हैं।
अशोक बुंदेला सीटू यूनियन महामंत्री पाथाखेडा
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