भोपाल (ब्यूरो)। महिला आरक्षण से मध्यप्रदेश की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह से बदलने वाली है। प्रदेश में वर्ष 2029 में जो लोकसभा चुनाव होंगे वे 29 नहीं बल्कि 43 सीटों के लिए हो सकते हैं। जिनमें से 14 सांसद महिलाएं होंगी। इसी तरह मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल सीटें 230 से बढ़कर 345 हो जाएंगी और इनमें से 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह वर्तमान महिला विधायकों की संख्या से चार गुना से ज्यादा है।
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियमÓ पर केंद्र सरकार एक बड़ा संशोधन लाने की तैयारी में है। पहले इस कानून को जनगणना 2027 के बाद लागू करने की तैयारी थी, लेकिन अब इसे जनगणना और परिसीमन की मौजूदा शर्त से अलग करके पहले लागू करना है। बताया जा रहा है कि यह महत्वपूर्ण बिल 29 मार्च को संसद में पेश किया जा सकता है। यह संशोधन विधेयक यदि पारित होता है, तो मध्य प्रदेश की सियासी तस्वीर पूरी तरह से बदल जाएगी। इस बदलाव से न केवल महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, बल्कि सीटों के गणित से लेकर सरकार बनाने के समीकरण और कैबिनेट के आकार तक सब कुछ बदल जाएगा।
अधिनियम में यह हैं प्रमुख प्रावधान
पिछले साल संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियमÓ लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33’ सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। इस कानून में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण न होकर, उन्हें कुल आरक्षित सीटों के भीतर ही कोटा दिया गया है।
पहले जनगणना का करना था इंतजार
मूल कानून में यह शर्त थी कि इसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू किया जाएगा, जिसमें काफी समय लग सकता था। अब प्रस्तावित संशोधन इसी ‘इंतजारÓ को खत्म करने का एक रास्ता है। सरकार का मानना है कि 2021 में होने वाली जनगणना कोविड के कारण पहले ही लंबित है, और इस प्रक्रिया में और देरी हो सकती है।
सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी
2011 के जनगणना आंकड़ों को आधार मानकर ही सीटों का परिसीमन कर दिया जाए। इसके तहत सभी राज्यों में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में 50′ की वृद्धि का प्रस्ताव है, जिससे बढ़ी हुई सीटों पर आरक्षण आसानी से लागू किया जा सके।
इस तरह बदलेगी मध्यप्रदेश की तस्वीर
संशोधन का असर मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों पर पड़ेगा। लोकसभा से लेकर विधानसभा तक सीटों का गणित बदल जाएगा। साथ ही विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं, जिनमें 6 महिला सांसद हैं। इन 29 सीटों में 20 अनारक्षित, 4 एससी और 5 एसटी के लिए आरक्षित हैं। महिला आरक्षण बिल में संशोधन के बाद सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी यानी मप्र में लोकसभा की कुल 43 सीटें होंगी। 33 फीसदी के हिसाब से 43 में से 14 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस बदलाव से केंद्र सरकार में मध्य प्रदेश की भागीदारी और राजनीतिक वजन दोनों बढ़ेगा। अधिक सांसद होने से राज्य अपनी मांगों और मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर और मजबूती से रख पाएगा।
विधानसभा की इस तरह बदलेगी स्थिति
मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, जिनमें बहुमत का आंकड़ा 116 है। वर्तमान में 27 महिला विधायक हैं। संशोधन के बाद 50′ बढ़कर 345 हो जाएंगी। वहीं 33 फीसदी आरक्षण के हिसाब से देखे तो 345 में से 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह मौजूदा महिला विधायकों की संख्या से चार गुना से भी ज्यादा है। विधानसभा का आकार बढऩे के साथ ही सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा भी बदल जाएगा। किसी भी दल को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए 345 में से कम से कम 174 सीटें जीतनी होंगी।
इस तरह से तय होंगी आरक्षित सीटें
महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित तय करने के लिए वर्तमान मसौदे में कोई स्पष्टता नहीं है, लेकिन इस संबंध में दो संभावनाएं जताई जा रही हैं। पहली लॉटरी सिस्टम की, जिसमें नगरीय निकायों और पंचायतों की तरह लॉटरी निकालकर सीटों का आरक्षण तय किया जा सकता है। वहीं दूसरी संभावना महिला जनसंख्या का आधार हो सकती है। जिन सीटों पर महिला मतदाताओं का अनुपात अधिक हो, उन्हें आरक्षित किया जा सकता है। हालांकि, जानकार लॉटरी सिस्टम की संभावना को अधिक बल दे रहे हैं क्योंकि अधिकांश सीटों पर महिला-पुरुष वोटर का अनुपात लगभग बराबर होता है।
स्थायी नहीं रहेंगी आरक्षित सीटें
इससे भी बड़ा राजनीतिक पेंच ‘रोटेशन सिस्टमÓ का है। आरक्षित सीटें स्थायी नहीं रहेंगी, बल्कि हर पांच साल बाद बदलती रहेंगी। इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं। साल 2029 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की जो 14 लोकसभा सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, वे 2034 के चुनाव में अनारक्षित हो सकती हैं और उनकी जगह किन्हीं दूसरी 14 सीटों को आरक्षित किया जाएगा। इसका मतलब है कि हर चुनाव में एक-तिहाई सीटों पर मौजूदा सांसदों का टिकट कटना लगभग तय हो जाएगा या उन्हें अपनी सीट बदलनी पड़ेगी। यही फॉर्मूला विधानसभा में भी लागू होगा। यह स्थिति राजनीतिक दलों और दशकों से एक ही सीट पर राजनीति कर रहे नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा करेगी।
महिला आरक्षण बदलेगा तस्वीर, प्रदेश में होंगी 114 विधायक और 14 सांसद
+ There are no comments
Add yours