30 जून को डब्ल्यूसीएल से 177, पावर हाउस से होंगे 18 कर्मी सेवानिवृत्त

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  • 195 कर्मियों के सेवानिवृत्त होने से क्षेत्र की आबादी पर पड़ेगा असर

सारनी। सिमटते उद्योग, घटते रोजगार के साधन के बीच औद्योगिक संस्थान से कर्मियों के सेवानिवृत्त होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इससे नगरीय क्षेत्र की आबादी लगातार कम हो रही है। 30 जून 2022 को वेकोलि पाथाखेड़ा क्षेत्र से 177 कोल कर्मी सेवानिवृत्त होंगे। इसी तरह मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी सारनी से 18 विद्युत कर्मी सेवानिवृत्त होंगे। यानी कि दोनों औधोगिक संस्थानों से 30 जून को 195 अधिकारी, कर्मचारी अपने कार्य से सेवानिवृत्त होंगे। इससे क्षेत्र की आबादी पर जबरदस्त विपरीत असर पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। डब्ल्यूसीएल की खदानों से प्रतिमाह कोल कर्मियों के सेवानिवृत्त होने से कर्मियों की संख्या घटकर 3000 के आसपास आ पहुँची है। गौरतलब है कि डेढ़ दशक में पाथाखेड़ा क्षेत्र की पांच भूमिगत कोयला खदान है बंद हुई है। जबकि एक भी नई खदान नहीं खुली। इसी तरह मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी के सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट की 9 विद्युत इकाइयां बंद हो गई। बीते डेढ़ दशक में जिले की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले सारनी, पाथाखेड़ा क्षेत्र की  औद्योगिक इकाइयां बंद होने से क्षेत्र में बेरोजगारी और पलायन तेजी से बढ़ गया। बावजूद इसके अब तक नई औद्योगिक इकाइयों को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है। जिसके चलते अभी भी पलायन बढ़ रहा है। 30 जून को सर्वाधिक 46 कोयला कामगार तवा टू और 44 कामगार तवा वन खदान से सेवानिवृत्त होंगे। इसी तरह छतरपुर 1 से 31 और छतरपुर टू से 27 कर्मी सेवानिवृत्त होंगे। वहीं सारनी खदान से 7, रीजनल वर्कशॉप से 10 और मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय से 12 कर्मी सेवानिवृत्त होंगे।

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