3 उपवनमंडल-6 परिक्षेत्र अब कंट्रोल रूम से होंगे कंट्रोल – दक्षिण वन मंडल में स्थापित हुआ MP का पहला फॉरेस्ट कंट्रोल रूम

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बैतूल। वनों को बचाने के लिए दक्षिण वन मंडल ने बड़ा नवाचार किया है। यहां मध्य प्रदेश वन विभाग का पहला फॉरेस्ट कंट्रोल रूम स्थापित किया है। जिससे वनमंडल के 3 उप वनमंडल में 6 परिक्षेत्र कंट्रोल रूम से सीधे जुड़ेंगे। इन इलाकों पर अब कैमरों की मदद से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा सकेगी। अवैध तस्करों पर निगरानी के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग का यह पहला फॉरेस्ट कंट्रोल रूम बनाया है।

ऐसे हुआ फॉरेस्ट कंट्रोल रूम की अवधारणा का जन्म

डीएफओ विजयानन्थम टीआर ने बताया कि दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल अंतर्गत 3 उप वन मंडल एवं 6 परिक्षेत्र शामिल है। जिसमें से 4 परिक्षेत्र मुलताई, भैंसदेही, आठनेर और सांवलमेंढा महाराष्ट्र राज्य की सीमा से लगने के कारण संवेदनशील क्षेत्र हैं। बैतूल बहुमूल्य लकड़ी सागौन के लिए जाना जाता है। मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्य की सीमा रेखा के निकटवर्ती सागौन माफिया न केवल इन राष्ट्रीय खजाने के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, बल्कि मुठभेड़ के दौरान इन माफिया गिरोहों का सामना करने वाले वन कर्मचारियों के लिए भी गंभीर जान का खतरा पैदा करते हैं।

हाल ही में राजस्थान में इमारती लकड़ी ले जाने वाले कुख्यात हरदा गिरोह से जुड़ा महुपानी अवैध कटाई का मामला और तेलंगाना में अवैध लकड़ी ले जाने वाले नर्मदापुरम गिरोह से जुड़ा मुलताई ट्रक मामला, दक्षिण बैतूल वनमंडल के लिए एक चुनौती के रूप में सामने आया। दोनों मामलों में अपराधियों ने प्रमुख सड़कों और प्रमुख टोलों को आसानी से पार कर लिया।

हालांकि हमने इन अपराधियों को जिला पुलिस विभाग के सहयोग से पकड़ लिया, लेकिन अंतर्निर्मित वन मंडल स्तरीय फॉरेस्ट कंट्रोल रूम की आवश्यकता समय की मांग है। इस प्रकार, फॉरेस्ट कंट्रोल रूम की अवधारणा का जन्म हुआ।

सौर ऊर्जा से संचालित 4 जी सीसीटीवी कैमरे लगाए

वन मंडलाधिकारी द्वारा उपवनमंडल अधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी एवं फील्ड स्टाफ के साथ चर्चा कर संवेदनशील सड़कों के व्यक्तिगत दौरे के बाद महाराष्ट्र सीमा वाली प्रमुख संवेदनशील सड़कों को चिह्नित कर 30 स्थानों पर सौर ऊर्जा से संचालित 4 जी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। यहां बिजली आपूर्ति संभव नहीं थी।

जिसका सीधा प्रसारण डिवीजन कार्यालय कंट्रोल रूम, परिक्षेत्र कार्यालय एवं उपवनमंडल कार्यालयों में भी उपलब्ध कराया है। कंट्रोल रूम में एक बड़े मॉनिटर के साथ अलग कंप्यूटर, प्रिंटर सेटअप लगाया है। इसके सुचारू रूप से संचालन के लिए फील्ड स्टाफ की रात्रि ड्यूटी लगाई जाती है।

जनोना एवं गौनापुर में स्थापित किए गए 6 अस्थायी बैरियर

महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध कटाई और अवैध लकड़ी परिवहन की घटनाओं पर नियंत्रण हेतु 6 अस्थायी बेरियर एवं 02 स्थाई बैरियर जनोना एवं गौनापुर स्थापित किए गए। इन बैरियरों में वन चौकीदारों और वर्दीधारी वन कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे का प्रयोग कर प्रतिदिन कंट्रोल रूम से इन बैरियरों पर रैंडम कॉल कर संबंधित बैरियर कर्मचारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाती है।

फील्ड स्टाफ द्वारा संदिग्ध वाहन की सूचना कंट्रोल रूम को प्राप्त होने पर सभी बेरियरों को तत्काल बंद कर दिया जाता है एवं कैमरे से निगरानी की जाती है। इससे फील्ड स्टाफ को सशक्तिकरण का एहसास होता है और वाहन चेकिंग में अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है। भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर वनमंडल के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी 4 जी सीसीटीवी कैमरे लगवाने का प्रावधान किया गया है।

कंट्रोल रूम को रिपोर्ट करेंगी गश्त टीम

परिक्षेत्रों में फील्ड स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए मुख्यालय स्तर से गूगल शीट के माध्यम से प्रतिदिन सभी कर्मचारियों की उपस्थिति शाम 6 बजे तक प्रविष्टि करवाई जाती है। उपलब्ध वन अमले अनुसार प्रतिदिन रेंज अधिकारी रात्रि गश्ती के लिए गश्ती दल बनाएंगे जो रात 9 बजे तक कंट्रोल रूम को रिपोर्ट करेंगी।

कंट्रोल रूम रात्रि गश्त टीम के सदस्यों के नाम और उनके द्वारा तय किए गए मार्ग का विवरण एकत्र करेगा। किसी भी फील्ड स्टाफ को किसी भी अपराध को रोकने के लिए बल की आवश्यकता होती है, तो वह कंट्रोल रूम को कॉल कर सकता है, फिर कंट्रोल रूम अपराध पर नजर रखने के लिए रात्रि गश्ती दल के पास डायल करेगा।

जरूरत के समय तैयार बल की उपलब्धता फील्ड स्टाफ को सशक्त बनाएगी। आगामी समय में आम जनता की शिकायतों के लिए भी फायर कंट्रोल रूम के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में पहली बार वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए वन विभाग द्वारा दक्षिण बैतूल वन मंडल की पहल पर फॉरेस्ट कंट्रोल रूम स्थापित किया है।

फायर कंट्रोल सेंटर

फायर सीजन वर्ष 2023 में आग पर नियंत्रण हेतु वनमंडल स्तर पर फायर कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया। परिणामस्वरूप पिछले वर्ष की तुलना में आग से प्रभावित वन क्षेत्र में कम दर्ज की गई। मध्यप्रदेश शासन वन विभाग के फाॅरेस्ट फायर काम्पेंडियम की रिपोर्ट के अनुसार फायर सीजन 2022 में दक्षिण बैतूल (सामान्य) वनमंडल मध्यप्रदेश में 17वें स्थान पर था।

फायर सीजन वर्ष 2023 में अन्य विभागों, वन समिति सदस्यों एवं आम नागरिकों से समन्वय स्थापित कर फायर अलर्ट कम करने के लिए विभिन्न प्रयास किए गए। साथ ही वन अग्नि की त्वरित सूचना के आदान प्रदान एवं दूरदराज के वन क्षेत्रों में आग की सूचना प्रेषित करने हेतु वनमंडल स्तर पर फायर कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया जो कि 24 घंटे कार्यरत था।

अग्नि की सूचना मिलते ही परिक्षेत्र सहायक और उनकी टीम को मौके पर उपस्थित होकर 4 घंटे में आग बुझाने के निर्देश दिए गए। आग पर काबू न पाने की स्थिति में परिक्षेत्र अधिकारी अपने संसाधन एकत्रित कर 8 घंटे के भीतर आग बुझाएंगे फिर भी यदि आग पर काबू न पाया जा सके तो उप वन मंडलाधिकारी वनमंडल के समस्त संसाधन का उपयोग कर 24 घंटे के भीतर आग बुझाने के निर्देश दिए गए।

प्रतिदिन शाम 6 बजे तक नियंत्रण कक्ष जंगल की आग के बारे में जानकारी एकत्रित कर वनमंडलाधिकारी को रिपोर्ट करेगा। ‘फायर कंट्रोल सेंटर’ से वन अग्नि की सूचना तत्काल संबंधित बीट में पदस्थ वन कर्मचारियों को प्राप्त हो जाती थी। जिससे कम से कम समय में आग पर काबू पाया जा सका।

आग पर काबू पाने हेतु प्रत्येक परिक्षेत्र को ब्लोअर भी प्रदाय किए गए। जिससे आग पर काबू पाने में आसानी हुई। वन कर्मचारियों को इस हेतु प्रशिक्षण भी दिया गया। वनमंडल अंतर्गत जिन वन समितियों ने वनों को आग से बचाने में उत्कृष्ट भूमिका निभाई, उन्हें वन अग्नि सुरक्षा प्रोत्साहन राशि प्रदाय की गई। इस समस्त प्रयासों से फायर सीजन वर्ष 2023 में वनमंडल अंतर्गत मात्र 344 फायर अलर्ट भारतीय वन संरक्षण से प्राप्त हुए जो विगत वर्ष की तुलना में 69 प्रतिशत कम है।

विगत फायर सीजन वर्ष 2022 में दक्षिण बैतूल (सामान्य) वनमंडल अन्तर्गत 1081 फायर अलर्ट प्राप्त हुए थे एवं 438.75 हेक्टेयर वन क्षेत्र अग्नि से प्रभावित हुआ था, फायर सीजन वर्ष 2023 में किए गए प्रयास के परिणामस्वरूप मात्र 101.142 हेक्टेयर वन क्षेत्र ही अग्नि से प्रभावित हुआ, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 78 प्रतिशत कम है। भविष्य में फायर कंट्रोल सेंटर का संचालन नियमित रूप से फॉरेस्ट कंट्रोल रूम के माध्यम से ही किए जाने की योजना है।

जियो-ट्रैकर ऐप का उपयोग
जियो-ट्रैकर ऐप वनकर्मी द्वारा जंगल के अंदर पैदल गश्ती को रिकॉर्ड करता है और इसे केएमएल फाइल में परिवर्तित करता है। एक डेमो वीडियो बनाकर कर्मचारियों को जियो-ट्रैकर ऐप का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया और 1 अगस्त, 2023 से 31 अगस्त, 2023 तक इसे पायलट रूप में वनमंडल के तीन परिक्षेत्र मुलताई, भैंसदेही एवं ताप्ती में शुरू किया गया। फील्ड स्टाफ ने बड़ी उत्साह के साथ जियो-ट्रैकर ऐप का उपयोग करना शुरू कर दिया।

फील्ड स्टॉफ द्वारा की गई गश्ती का जियो ट्रैकर के माध्यम से केएमएल फाइलें एकत्र की और गूगल अर्थ के माध्यम से इसका विश्लेषण करने पर पाया कि फील्ड स्टॉफ द्वारा 1207 किमी पैदल गश्ती की गई। जियो ट्रैकर ऐप का सफलतापूर्वक परीक्षण के बाद 1 सितंबर, 2023 से वनमंडल के समस्त परिक्षेत्रों में स्टाफ द्वारा जियो-ट्रेकर ऐप का उपयोग करना प्रारम्भ कर दिया है।

जियो ट्रैकर एप के माध्यम से कर्मचारियों द्वारा कवर किए गए क्षेत्रों का पता चला पाता है, जिससे आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है। जंगल के भीतर अधिक से अधिक गश्ती करने वाले वन कर्मी को प्रोत्साहित भी किया जाता है।

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