- केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ होगा व्यापक आंदोलन
सारनी। श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आगामी 26 नवंबर 2020 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया. दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों और उनके सहयोगी संगठनों की घोषणा के अनुसार हड़ताल पर जाने का निर्णय दो अक्टूबर को कामगारों के ऑनलाइन राष्ट्रीय सम्मेलन में किया गया. इसमें कहा गया है कि सम्मेलन में सभी कामगारों से, चाहे वे यूनियन से जुड़े हो या नहीं, संबद्ध हो अथवा नहीं, संगठित क्षेत्र से या फिर असंगठित क्षेत्र से जुड़े हों.
सरकार की जन विरोधी,कर्मचारी विरोधी,किसान विरोधी और राष्ट्रविरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त संघर्ष को तेज करने के लिए देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान किया गया है. केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र महासंघों/संघों द्वारा संयुक्त रूप से ऑनलाइन आयोजित कामगारों का राष्ट्रीय सम्मेलन महामारी के बीच पहली बार हुआ है. ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया कि जहां सभी संकेत यह बता रहे हैं कि मांग में कमी के कारण अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आ रही है, सरकार कारोबार सुगमता के नाम पर अपनी नीतियों को आगे बढ़ा रही है। इससे निर्धनता तथा संकट और बढ़ रहा है. सम्मेलन में कामगारों से संयुक्त रूप से राज्य/जिला/उद्योग/क्षेत्र के स्तर पर जहां भी संभव हो, भौतिक रूप से अन्यथा ऑनलाइन सम्मेलन अक्टूबर के अंत तक आयोजित करने को कहा गया है.
डॉ. मोदी ने बताया कि यह सम्मेलन इस बात को दृढ़तापूर्वक स्वीकार करता है कि इस स्थिति में पूरे श्रमिक वर्ग द्वारा अवज्ञा और असहयोग के रूप में एकजुट संघर्ष लाज़मी है। यह सम्मलेन कामकाजी लोगों, श्रमिकों, किसानों और कृषि श्रमिकों के सभी वर्गों की एकजुटता का आह्वान करता है।
प्रमुख मांगे
- सभी गैर आयकर दाता परिवारों के लिए प्रति माह 7500 रुपये का नकद हस्तांतरण।
- सभी जरूरतमंदों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 10 किलो मुफ्त राशन।
- मनरेगा का शहरी क्षेत्रों में विस्तार सहित 200 दिनों का काम।
- सभी किसान विरोधी कानूनों और मजदूर विरोधी श्रम संहिता को वापस लेना।
- सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- सरकार और पीएसयू कर्मचारियों की समय से पहले सेवानिवृत्ति पर वापस लेने।
- सभी को पेंशन प्रदान करें,एनपीएस को ख़त्म करें और पहले की पेंशन को बहाल करें, ईपीएस -95 में सुधार करें।
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