संतान के दीर्घायु के लिए भोजपुरी समाज की महिलाओं ने रखा निर्जला जीवित्पुत्रिका व्रत

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भोपाल। भोजपुरी एकता मंच के तत्वाधान में शीतल दास की बगिया कमला पार्क भोपाल में जीवित्पुत्रिका निर्जला व्रत का आयोजन किया गया! भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि भोजपुरी समाज के निर्जला व्रतधारी महिलाओं ने घाट दोपहर से ही आगमन शुरू हो गया ! तालाब में सभी महिलाएं स्नान के उपरांत अपने पितरों को और सरसों का तेल खली के पत्ते रखकर जल में प्रवाहित का अर्धा अर्पित किया! उसके उपरांत घाट पर ही जीमूत वाहन गाय के गोबर से मूर्ति बनाकर पुष्प अक्षत धूप दीप पूजा अर्चना एवं आरती की उसके उपरांत सियार सियारिन एवं जीमूत वाहन का कथा का श्रवण किया! पारण 11 सितंबर 2020 को प्रातः होगा!
भगवान शिव ने माता पार्वती को जीवित्पुत्रिका व्रत के जीमूतवाहन कथा सुनाइए जो इस प्रकार है!
गंधर्व के राजकुमार का नाम जीमूतवाहन था वह बड़े उधार और परोपकारी राजा थे जीमूत वाहन के पिता ने वृद्धावस्था में वानप्रस्थ आश्रम मैं जाते समय उनको राज सिंहासन पर बैठाया किंतु उनका मन राजपाट में नहीं लगता था! वे राज्य का भार अपने भाइयों को छोड़कर स्वयं वन में की सेवा करने चले गए वहीं ऑन पर उनका मलयवती नामक राज कन्या से विवाह हो गया! जीमूत वाहन एक दिन जब वन में भ्रमण करते हुए काफी आगे चले गए, तब एक वृद्धा विलाप दिखाई दिया! पूछने पर वृद्धा होते हुए बताया कि मैं नागवंश की स्त्री हूं और मुझे एक ही पुत्र है जो कि पक्षीराज गरुड़ के समक्ष नागो ने उन्हें प्रतिदिन भक्षण हेतु नाग सौंपने के प्रतिज्ञा की है! आज मेरे पुत्र की बलि का दिन है! जीमूतवाहन ने वृद्धा को आश्वस्त करते हुए कहां डरो मत मैं तुम्हारे पुत्र के प्राणों की रक्षा करूंगा, उसके बजाय मैं स्वयं अपने आपको उसका आहार बनूंगा.

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