वेकोलि प्रबंधन द्वारा बने मेडिकल के बाद होती है गाड़ी लोड, मेडिकल की वैधता 24 घंटे
सारनी। वेकोलि के कोयले के परिवहन हेतु ट्रक चालकों को इन दिनों काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बताया जाता है कि वेकोलि प्रबंधन के नए-नए नियम एवं प्रबंधन के कुछ मेडिकल विभाग के कर्मचारियों की वजह से ट्रक चालकों को काफी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। जिसका एक मामला प्रकाश आया जिसमें प्राप्त जानकारी अनुसार वेकोलि प्रबंधन के द्वारा ट्रक चालकों के मेडिकल को लेकर आए दिन परेशान किया जा रहा है। जिसने कि प्रबंधन द्वारा नियम लागू किया गया है कि ट्रक चालकों का मेडिकल वेकोलि प्रबंधन के द्वारा मान्य किया जाएगा तभी उन्हें कोल परिवहन की अनुमति दी जाएगी। जबकि अभी ट्रक चालकों के द्वारा अपना मेडिकल शासकीय चिकित्सालय घोड़ाडोंगरी से ही बना लिया जाता है। जिसे भी वेकोलि प्रबंधक मान्य नहीं करता है और वह अपना मेडिकल बनाने हेतु ट्रक चालकों को बाध्य करते हैं जिसके लिए उन्हें घंटों लाइन लगानी पड़ती है उसमें भी मेडिकल विभाग के अधिकारी काफी लेट लतीफ आते हैं या तो वे लंच टाइम के समय आते हैं और बोलते हैं अब हमें जाना है। जिसका जीता जागता उदाहरण हमारे द्वारा सोमवार को कालीमाई बैरियर पर देखने को मिला, जहां हमें जानकारी लगी थी कि बैरियर पर ट्रक चालकों की काफी भीड़ जमा थी जिसकी जानकारी लेने हेतु जब हम पहुंचे तो वहां पता लगा कि प्रबंधन के मेडिकल विभाग के कुछ कर्मचारी की लापरवाही के कारण उक्त भीड़ जमा हुई है। हमारे द्वारा लगभग एक 2 घंटे वहां इंतजार करने के बाद देखने में आया कि मेडिकल विभाग के जिस अधिकारी के अंतिम हस्ताक्षर करने के बाद ट्रक चालकों का मेडिकल मान्य माना जाता वह अधिकारी दोपहर 12:30 बजे तक नहीं आये, हमारे पहुंचने की जानकारी जैसे वेकोलि के मेडिकल विभाग के कर्मचारियों को लगी तो उन्होंने कालीमाई बेरियर पर उपस्थित असिस्टेंट को कहा कि वे उक्त ट्रक चालकों की एंट्री करें और हम आकर अंतिम हस्ताक्षर कर मेडिकल जारी कर देंगे। इस दौरान देखने को मिला कि कालीमाई बैरियर पर मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के कारण सभी ट्रक चालक बिना सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के ही खड़े रहे, वेकोलि प्रबंधन के मेडिकल विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण कहीं बहुत बड़ी चुप ना हो जाए। इस बारे में जानकारी देते हुए संतोष राजेश, हारून पटेल, चंद्रभान, गज्जू सिंह, शिवशंकर यादव, मनोहर, एकनाथ, विजय टीका, गोरु सिंह ने बताया कि आये दिनों वेकोलि प्रबंधन के द्वारा बहुत सारे नियम कायदे लागू किए जा रहे हैं इससे हमें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और इन सभी नियमों के बीच मेडिकल बनाने का नियम बहुत ही परेशानीदायक है। क्योंकि इस मेडिकल को बनाने हेतु नंबर लगाना पड़ता है और नंबर के पश्चात गाड़ी को सात से आठ दिन बाद खदान पर लगाकर कोर परिवहन हेतु नंबर मिलता है जिसमें भी वेकोलि मेडिकल विभाग अधिकारी लेटलतीफी आते हैं कई बार तो 6 से 7 घंटे खड़े होने के बाद अधिकारी आते हैं।
24 घंटे का मेडिकल होता है मान्य
बताया जाता है कि वेकोलि विभाग द्वारा जारी मेडिकल 24 घंटे के लिए ही मान्य होता है अगर इस बीच कुछ भी होता है कोई नया मेडिकल जारी करवाना पड़ता है। शासकीय विद्यालय घोड़ाडोंगरी से जारी मेडिकल को भी कर्मचारी नहीं करते हैं। वेकोलि के मेडिकल जारी करने हेतु निर्धारित समय सुबह 10:30 से 1 बजे तक किया गया है जिसमें कि समय पर वेकोलि मेडिकल विभाग के अधिकारी के ना आने से मेडिकल हेतु काफी लंबी लाइन लग जाती है। परंतु मेडिकल हेतु एंट्री करने वाला असिस्टेंट उक्त मेडिकल अधिकारी से पहले ही आकर बैठा रहता है। जिसको लेकर ट्रक चालको ने मांग करी की उक्त समय को 3 बजे तक किया जाना चाहिए।
15-20 गाड़िया भरती है प्रतिदिन
ट्रक चालकों ने बताया कि मेडिकल के बनने के पश्चात दोनों माइंसो से प्रतिदिन लगभग 15 से 20 गाड़ियां भरती है, जिसमें भी गाड़ियों का नंबर 7-8 दिन बाद आता है। तवा 2 में 5-6 दिन बाद, तवा 1 में 7-8 दिन बाद गाड़ियों के नंबर लगते हैं परंतु इस बीच अगर किसी गाड़ी का चालक कहीं चला जाता है तो उसके लिए बाकी पीछे लगे ट्रक ड्राइवरों को पहले नंबर पर मौजूद ट्रक ड्राइवर के आने का इंतजार करना पड़ता है जिसमें कि काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, ट्रक चालकों ने बताया कि हमें गाड़ियों के नंबरों से दिक्कत नहीं है। परंतु दिक्कत यह है कि गाड़ियां नंबर से निकलेगी जितने परिवर्तन किया जाना चाहिए।
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