- सुबह-शाम रामायण पाठ किए बिना नहीं करते भोजन
बैतूल। जहां सुमति तहाँ संपति नाना, जहां कुमति तहाँ विपत्ति निदाना वाली कहावत ग्राम पुसली के एक परिवार पर चरितार्थ होती है। जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर छोटे से कस्बे में बसा एक परिवार ऐसा है जहां पर लगभग 60 वर्षों से सुबह-शाम परिवार का कोई भी सदस्य बगैर रामायण पाठ किए भोजन नहीं करता है। पीढ़ियों से आ रही परंपरा को परिवार के मुखिया पेशे से किसान लाखन डढोरे ने कायम करते हुए परिवार को ऐसे संस्कार दिए कि घर के छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक कितनी भी विषम परिस्थिति हो रामायण का पाठ करना नहीं भूलते। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे जब छोटे थे और परिवार का मुखिया घर में अनुपस्थित रहते थे तो उनकी पत्नी श्रीमती रामप्यारी बाई डढोरे मोहल्ले पड़ोस से किसी शिक्षित व्यक्ति को बुलाकर रामायण पाठ करवाती थी। अब बच्चे व नातियों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाकर संस्कारवान परिवार की मिसाल कायम की है। इनके बेटे झब्बू, ऋषि कुमार, मदनलाल व डॉ.धनराज डढोरे व इनकी एक बेटी कौशल्या देवी भी अपने पिता के आदर्शों को आगे बढ़ाकर आने वाली पीढ़ी को रामायण पाठ करने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे है। इस परिवार की इस परंपरा को देखकर मोहल्लावासी व रिश्तेदारों ने भी रामायण पाठ प्रारंभ कर इस परंपरा को आगे बढ़ाया ही नहीं, बल्कि अपने परिचितों को भी परिवार की सुख समृद्धि व शांति के लिए रामायण पाठ करने प्रेरित किया।
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