भोपाल। एक व्यक्ती सूजा हुआ मुंह लिये एम्स् भोपाल के प्रांगण में पर्चा न वन पाने के कारण परेशान हालत में अपने साथी के साथ खड़ा है फिर दोनों में चर्चा हुई ओर डेन्टल डिपार्टमेंट देखने की इक्छा से डेन्टल डिपार्टमेंट गये ओर वहीं आस पास उदास खड़े खड़े बताया रहे थे, कुछ समय बाद एक सफेद कोट पहने नोजवान , आकर्षक ओर प्रभावी व्यक्तित्व बाला व्यक्ती निकल रहा था ,वह उनके पास रूका ओर उदास परेशान खडे होने का आरण जानना चाहा ,भरी आवाज में सूजे मुह वाले आदमी ने बताया कि वे लोग विदिशा से आये है अपनी दांतों की समस्या बतलाने , पर्चा न वन पाने के कारण डाक्टर को दिखला नही सकते कष्ट ज्यादा है,उनकी यह हालत देखकर सफेद कोट वाले व्यक्ती जो डा अंशुल राय थे ने तसल्ली देते हुए अंदर अपने कक्ष में ले गये ओर उनका पर्चा बनवाया ,चेक अप के साथ उचित ओर समाधान कारक इलाज किया ,बस फिर क्या था इस लोगों ने विदिशा आकर जो गुणगान शुरू किया यह वात अनेक लोगों सहित मुझ तक आयी ओर मेने खोज खवर लेना आरम्भ की तो ज्ञात हुआ यह है डा अंशुल राय है इन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा विदिशा कान्वेंट में ग्रहण की थी जव उनके पिता श्री आदरणीय श्री विदिशा में बेंक मेनेजर थे, ।
उनका यह कार्य विदिशा से लगाव होना ,उनकी सम्वेदन शीलता ओर विदिशा एवं विदिशा वासियों के प्रति मान सम्मान को तो दर्शाता ही है साथ ही उनकी निरअहंकारता ,ओर डाक्टरी कर्म के प्रति समर्पण का भी ध्योतक है।
डा अंशुल राय MDH , Maxilo Facial Surgery में है।वे आज AIIMS Bhopal में सेवारत है
शायर ने नाराज होकर कुछ इस तरह लिखा__
इल्मो अदब के सारे खज़ाने गुज़र गए,
क्या खूब थे वो लोग पुराने गुज़र गए
बाकी है जमीं पे फ़कत आदमी की भीड़,
इन्सां को मरे हुए तो ज़माने गुज़र गए।।
डा.राय ओर उन जैसी शख्सियतों का उल्लेख इस लिए भी है ,,नहीं अभी भी इल्मो अदव वाले, इन्सानियत से भरपूर इन्सा आज भी है।
अव भी ऐसे लोग हैं,भले ही थोडे है किन्तु है,तव ही तो हम उनकी चर्चा करते हैं ओर हम आज हम ,डा अंशुल राय की , चर्चा करेंगें, वे ऐसा व्यक्तित्व है जिनको रेखांकित किया जाना चाहिए और खूव किया जाना चाहिए।
–। डा राय एक उच्च कोटी के सर्जन है , उन्होंने चेहरे ओर समस्या ग्रसित दांतों के लगभग दो हजार आप्रेशन किये है,ओर निरंतर सेवारत हैं।
–उनके अनेक लेख ओर ज्ञान वर्धक जानकारी रेपूटेटेड मेडीकल जनरलों में छापी गयी है।
–सव जानते हैं ऐम्स के चिकित्सक निजी प्रक्टिस नही कर सकते ,ऐसी स्थिति में निस्वार्थ रूप से मरीजों को न केवल व्यक्तिगत रूप से ध्यान देते हैं ,बल्कि कई अभावग्रस्त मरीजों को दवा आदि की मदद भी करते है।
डा अंशुल राय भारत के सफलतम चिकित्सक होंगे।
इल्मो अदब के सारे खज़ाने गुज़र गए,
क्या खूब थे वो लोग पुराने गुज़र गए
बाकी है जमीं पे फ़कत आदमी की भीड़,
इन्सां को मरे हुए तो ज़माने गुज़र गए।।
अव भी ऐसे लोग हैं,भले ही थोडे है किन्तु है,तव ही तो हम उनकी चर्चा करते हैं ओर हम आज हम चर्चा करेंगे ,डा अंशुल राय की ,एक ऐसा व्यक्तित्व जिन्हें रेखांकित किया जाना चाहिए और खूव किया जाना चाहिए और वो है
डा अंशुल राय, जिन्होंने
MDH (मेक्सिलोफेसियल सर्जरी)maxilo Facial Surgery. तक उच्च शिक्षा चिकित्सा क्षेत्र में प्राप्त की
है , बर्तमान में AIIMS Bhopal (M.P.) में सेवारत है। आप के पिता श्री आदरणीय श्री……… विदिशा में ……… बेंक में कार्यरत रहे हैं।
नजर नजर में उतरना कमाल होता है,
नफस नफस में बिखरना कमाल होता है।
बुलंदियों पर पहुंचना कोई
कमाल नहीं ,
बुलंदियों पर ठहरना कमाल होता है।।
+ There are no comments
Add yours