पीएम मोदी से भूमि पूजन करवाने वाले पंडित बोले- कितनी दक्षिणा मिली, ये नहीं बताते; बार-बार पीएम को समझा रहा था ताकि पूजन में गलती ना हो

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  • 21 लोगों में अयोध्या के 5, दिल्ली के 5, बस्ती से 1, काशी से 5, प्रयाग से 1, दक्षिण भारत से 3 और 1 आचार्य वृंदावन से अनुष्ठान में शामिल हुए थे
  • अपने-अपने मठों-आश्रमों में लौटने लगे संत-महात्मा, बोले-अब काशी-मथुरा की बारी है; इकबाल बोले-पीएम सबको साथ लेकर चलना चाहते है

अयोध्या। उत्तर प्रदेश में राम की नगरी अयोध्या के आसमान में कुछ देर हवाई परिक्रमा के बाद प्रधानमंत्री मोदी का हेलीकॉप्टर जब साकेत ग्राउंड पर उतरा तो जय श्रीराम के नारों की आवाज उस आसमान तक जरूर पहुंची होगी। जब हनुमानगढ़ी के दर्शन पूजन कर मोदी जन्मभूमि पहुंचे, वहां दंडवत रामलला को प्रणाम किया, विधि विधान से भूमिपूजन किया तो पूरी अयोध्या टकटकी लगाए उन्हें टीवी पर देख-सुन रही थी। सड़कें सुनसान थीं, मानों परिंदे भी उड़ने से पहले कुछ देर के लिए पर थामे बैठ गए थे। पूरी अयोध्या टीवी से चिपकी उनका भाषण सुन रही थी, अपने शहर में महसूस कर रही थी। 3 घण्टे तक अयोध्या का सन्नाटा साफ महसूस किया जा सकता था। राम जन्मभूमि पर पूजन के बाद सभी मेहमानों ने रामलला के दर्शन किये और उसके बाद जहां वो ठहरे थे, वहां लौट आए। मोदी जी से भूमिपूजन के विधान कराने वाले पंडित चंद्रभान पांडेय भी कारसेवकपुरम् लौट आए। यहां उनसे हमारी मुलाकात हुई।

मुख्य पुजारी चंद्रभानु पांडेय अपने साथी पुरोहितों के साथ।

हमारे लिए यह गौरव का क्षण: चंद्रभान पांडेय

चंद्रभान कहते हैं, उनके लिए ये बहुत गौरव का क्षण था। उन्होंने बताया कि पूरा अनुष्ठान संस्कृत के श्लोकों में हुआ है। पूजन में कोई गलती न हो इसलिए साथी पुरोहित बार-बार पीएम को समझा रहे थे। पूरे अनुष्ठान को पीएम मोदी ने भी बड़ी तन्मयता से पूरा किया। वह खुद भी कोई गलती नही चाहते थे।

एसपीजी का प्रोटोकॉल था, इसलिए सबके बीच दूरी काफी थी लेकिन जब भी पीएम को परेशानी हुई साथी पुरोहितों ने पहुंच कर उनका सहयोग किया और शांतिपूर्ण ढंग से अनुष्ठान पूरा हो गया। उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से मैं और आचार्य जयप्रकाश काशी से थे।

बाकी 21 लोगों में अयोध्या के 5, दिल्ली के 5, 1 बस्ती, काशी से 5, प्रयागराज से 1, 3 दक्षिण भारत से और 1 आचार्य वृंदावन से अनुष्ठान में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह के अनुष्ठान में यजमान होना आवश्यक है तो अशोक सिंघल जी के भतीजे यजमान के रूप में पत्नी के साथ बैठे थे।

वैदेही भवन में फूलडोल महाराज।

अपने अपने मठों-आश्रमों में लौटने लगे संत-महात्मा, बोले-अब काशी-मथुरा की बारी भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देशभर से आए कुछ संत स्थान वैदेही भवन में ही ठहरे हुए हैं। कार्यक्रम-खत्म होने के बाद सभी संत अपने-अपने सेवकों के साथ भोजन कर अपने आश्रमों और मठों के लिए निकल पड़े। विदाई से पहले गेट पर उन्हें रामलला का प्रसाद भी दिया जा रहा है।

यही हमारी मुलाकात अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी से हुई। नरेंद्र गिरी ने कहा, अब मथुरा-काशी की बारी है। हालांकि, वह कहते है न्यायोचित तरीके से ही सब लेंगे। बस इंतजार करिए सब होगा।

वहीं वृंदावन से आये ने महंत फूल डोल बिहारी दास ने कहा रामलला का मंदिर का आरंभ हो गया है। अब आनंद ही आनंद और परमानंद का अनुभव कर रहा हूं। मथुरा-काशी पर बोले अभी एक बन जाये। हल्ला करने से कुछ नही होगा। जब समय आएगा तो वह भी होगा।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के साथ उनके सहयेागी।

वाराणसी से आये जितेंद्रानंद सरस्वती कहते हैं, ”मैं 1986 से राम जन्मभूमि पर आ रहा हूं। लेकिन, आज अनुष्ठान में शामिल होकर महसूस हुआ कि हमारे ऊपर 1 हजार वर्ष पूर्व से गुलामी का दाग था, वह मिट गया। इस भूमिपूजन से पूरे देश मे एक सकारात्मक परिवर्तन वातावरण में आएगा।” मथुरा-काशी पर कहा कि पहले यह मंदिर निर्माण पूरा हो। फिर आगे वह भी देखा जाएगा।

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