

सारनी। विद्या भारती मध्यभारत प्रांत द्वारा “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और उसके क्रियान्वयन में हमारी भूमिका” विषय पर व्याख्यान बेवीनार के माध्यम से आयोजित किया गया। सरस्वती विद्या मंदिर सारनी के प्राचार्य राजेन्द्र तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य वक्ता के रुप में डी रामकृष्ण राव (अध्यक्ष, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान) ने कहा कि सभी विकासशील देश भारत की ओर देख रहे हैं। भविष्य को ध्यान में रखते हुए व्यक्ति एवं समूह के समग्र विकास हेतु इस शिक्षा नीति का क्रियान्वयन हुआ है। शिक्षक कैसा व्यवहार करता है? यह शिक्षक पर निर्भर है। विद्यालय स्तर पर कार्य करने वाले लगभग 1.5 करोड़ आचार्य भारत में हैं। सरकार को चाहिए कि इतने बड़े तन्त्र को कैसे प्रशिक्षित किया जाए? यह विचार करे विद्या भारती सरकार के इस प्रयास में सहयोगी भूमिका में रहे। डी. रामकृष्ण राव ने कहा कि हमारी शिशुवाटिका पद्धति सर्वश्रेष्ठ है जिस पर विद्याभारती 40 वर्षो से निरन्तर कार्य कर रही है। ज्ञान है वह अखिण्डत रहे इसके लिए अच्छी विषय वस्तु सामग्री तैयार करना है। अनुभव ज्ञान एवं सम्मिलित ज्ञान का प्रयोग करना है। अभी कक्षा-कक्ष में प्रतियोगितात्मक वेश वातावरण चल रहा है लेकिन अब हमें अनुभवपरक ज्ञान प्राप्त करने के लिए लेसन प्लान तैयार कर अध्ययन कराना है। डी. रामकृष्ण राव ने कहा कि पाठ्यचर्चा के साथ व्यक्ति निर्माण करने हेतु कला का समावेश करना कुछ आवश्यक गुण विद्यार्थियों मेें देना। वैज्ञानिक सोच, कला, सौन्दर्य बोध, टोली भाव, समस्या सुलझाना आदि गतिविधियों को जोड़ना यह आवश्यक है। समग्र मूल्यांकन पत्रक मूल्यांकन के बारे में सोचकर प्रगति पत्रक तैयार करना चाहिए। हमें स्वमूल्यांकन, सहविद्यार्थी को ध्यान में रखकर एक मूल्यांकन पत्रक तैयार करना है। पूर्व में सतत् मूल्यांकन पत्रक तैयार कर विद्याभारती ने सरकार को 1989 में दिया था। 2006 में यह मूल्यांकन पत्रक लागू किया गया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि रहे इन्दर सिंह परमार (स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री, म.प्र.शासन) ने कहा कि भारतीय शिक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। प्रत्येक राज्य ने इसका स्वागत किया है। हम लोग भी विद्या भारती के सहयोग से आगे बढ़ेंगे और इस नई शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन करेंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष सरस्वती वंदना से किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर हितानंद शर्मा (प्रांतीय संगठन मंत्री, मध्य भारत प्रांत), शशिकांत फड़के आदि उपस्थित रहे। इस अवसर पर भालचन्द्र रावले (क्षेत्र संगठन मंत्री) डाॅ. रविन्द्र कान्हेरे (अध्यक्ष, फीस निर्धारण समति, उच्च शिक्षा, म.प्र.), प्रकाश बरतूनिया (सहमंत्री, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान), डाॅ.संजय पटवा (क्षेत्र सह मंत्री) शिरोमणि दुबे (अध्यक्ष, सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान, भोपाल) एवं समस्त समिति पदाधिकारी, समस्त प्राचार्य, आचार्य, पूर्वछात्र आदि उपस्थित रहे।
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