जब तक हर व्यक्ति जागेगा नहीं तब तक बदलाव संभव नहीं: डॉक्टर चेतन सिंह सोलंकी

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  • आर.डी.पब्लिक स्कूल पहुंची सोलर एनर्जी स्वराज यात्रा, विद्यार्थियों ने जाना सौर ऊर्जा का महत्व
  • सोलर मेन आईआईटी मुम्बई के प्राध्यापक डॉ. चेतन सिंह सोलंकी ने कार्यशाला में छात्र-छात्राओं की जिज्ञासाओं को किया शांत

बैतूल। जिले के बहुप्रतिष्ठित आरडी पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को सोलर मेन आईआईटी मुम्बई के प्राध्यापक डॉ चेतन सिंह सोलंकी की 11 वर्ष के लिए निकाली जा रही सोलर एनर्जी स्वराज यात्रा जब पहुंची तो विद्यार्थियों को एक बार फिर कुछ नया सीखने और जानने का मौका मिला। सोलर मेन से प्रसिद्ध चेतन सिंह सोलंकी का विद्यालय की छात्राओं द्वारा पुष्प गुच्छ एवं तिलक लगाकर स्वागत वंदन किया।
इस अवसर पर आरडीपीएस के सभागृह में विद्यार्थियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सोलर मेन चेतन सिंह सोलंकी, संतोष थनिकांत, रामकृष्ण शिक्षा समिति के कोषाध्यक्ष मुकेश खण्डेलवाल, सीए प्रदीप खण्डेलवाल, गायत्री परिवार हरिद्वार से उत्तम गायकवाड़, अरविंद शिक्षा समिति के अध्यक्ष कश्मीरीलाल बतरा एवं आरडीपीएस संचालक रितु खण्डेलवाल प्रमुख रुप से मौजूद थी। कार्यशाला के दौरान डॉ चेतन ने विद्यार्थियों को सोलर ऊर्जा और इसकी उपयोगिता को लेकर बेहद प्रभावी उद्बोधन के माध्यम से जानकारी दी। आरडीपीएस संचालक श्रीमती खण्डेलवाल ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को देखते हुए सवाल-जवाब के लिए विद्यार्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया। जिसमें विद्यार्थी सीधे डॉ चेतन से रुबरू हुए और उन्होनें अपने मन में उठ रहे सवाल डॉ चेतन के सामने रखे जिसके उन्होंने प्रभावी तरीके से जवाब देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासा को शांत किया।
एनर्जी स्वराज अपनाने से हो सकता है बदलाव- डॉ चेतन
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ चेतन ने सौर ऊर्जा को लेकर विभिन्न जानकारियां विद्यार्थियों को दी। उन्होंने बताया कि प्रकृति का लगातार दोहन होने से प्रकृति का लगातार क्षरण हो रहा है। प्रकृति की हालत खराब है। भयावह स्थितियां सामने आने लगी है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण एक कोरोना वायरस है जिसकी वजह से पूरे विश्व को बदलना पड़ा। प्रकृति के संरक्षण के लिए हम सभी को एक्टिव होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 1850 के पहले जब औद्योगिकीकरण नहीं हुआ था हम सभी सोलर एनर्जी पर आश्रित थे। कोल, पेट्रोल, डीजल, गैस का उपयोग करने से प्रकृति में गड़बड़ी हुई है। इसका साल्यूशन बस इनका उपयोग बंद करना और फिर से सौ फीसदी सोलर ऊर्जा पर आश्रित होना ही है। उन्होंने बताया कि विश्व ने वर्ष 2015 में तय किया था कि 2030 तक कार्बन डाय ऑक्साईड का उत्सर्जन कम और 2050 तक जीरो तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था लेकिन लगता नहीं कि 30 साल में हम यह बंद कर पाएंगे। विश्व का तापमान लगातार बढ़ रहा है। यदि इसे रोका नहीं गया तो अपरिवर्तनीय हो जाएगा। फिर चाहे दुनियां के सारे लोग साधु संत क्यों न बन जाए इसे नहीं रोका जा सकेगा। डॉ चेतन ने कहा कि यदि हम एनर्जी स्वराज अपना ले तो बहुत बड़ा बदलाव हो सकता है। इसके लिए पूरी दुनियां की सरकारें कुछ नहीं कर पाएंगी जन आंदोलन से संभव होगा। जब तक हर व्यक्ति जागेगा नहीं तब तक बदलाव संभव नहीं।
बदलाव के लिए शुरुआत जरुरी- रितु खण्डेलवाल
आरडीपीएस संचालक रितु खण्डेलवाल ने कार्यशाला के दौरान आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय महत्वपूर्ण है। सोलर ऊर्जा के लिए जिस तरह से सोलर एनर्जी यात्रा 11 वर्षों के लिए निकाली गई है वह बदलाव का संकेत है। राजस्थान में ग्रामीण महिलाओं को सोलर एनर्जी के लिए प्रेरित किया और उन्होने सोलर ऊर्जा के उत्पादन में महत्वपूर्ण रोल निभाया। ऐसे अवसर बार-बार नहीं आते। विद्यार्थियों से उन्होनें बिना किसी झिझक के सोलर एनर्जी और डॉ चेतन के लक्ष्य पर सवाल करने भी प्रेरित किया। उन्होनें कहा कि किसी भी बदलाव के लिए शुरुआत जरुरी है। यह बदलाव युवा पीढ़ी ही ला सकती है। कार्यक्रम के अंत में आरडीपीएस के विद्यार्थियों ने डॉ चेतन से बिगड़ते पर्यावरण, पॉलीथिन के बढ़ते उपयोग, एवं बिजली और सौर ऊर्जा संबंधी कई सवाल पूछे। आरडीपीएस के प्रांगण में स्वराज एनर्जी बस में सौर ऊर्जा संबंधी उपकरणों को उत्सुकता से बच्चों ने देखा।

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