गोंडवाना की रानी दुर्गावती के बलिदान को कभी भुलाया नही जा सकता – दीपक उइके

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भाजयुमो के प्रदेश मंत्री दीपक उइके ने बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित कर किया नमन
सारनी। महान वीरांगना रानी दुर्गावती जी के बलिदान दिवस पर भाजयुमो प्रदेश मंत्री दीपक उइके ने चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर भाजयुमो के प्रदेश मंत्री दीपक उइके ने कहा कि वीरांगना महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकमात्र संतान थीं। महोबा के राठ गांव में 1524 ई. की दुर्गाष्टमी पर जन्म के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। नाम के अनुरूप ही तेज, साहस, शौर्य और सुन्दरता के कारण इनकी प्रसिद्धि सब ओर फैल गयी। दुर्गावती के मायके और ससुराल पक्ष की जाति भिन्न थी लेकिन फिर भी दुर्गावती की प्रसिद्धि से प्रभावित होकर राजा संग्राम शाह ने अपने पुत्र दलपतशाह से विवाह करके, उसे अपनी पुत्रवधू बनाया था। दुर्भाग्यवश विवाह के चार वर्ष बाद ही राजा दलपतशाह का निधन हो गया। उस समय दुर्गावती की गोद में तीन वर्षीय नारायण ही था। अतः रानी ने स्वयं ही गढ़मंडला का शासन संभाल लिया। उन्होंने अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ी तथा धर्मशालाएं बनवाई। वर्तमान जबलपुर उनके राज्य का केन्द्र था। उन्होंने अपनी दासी के नाम पर चेरीताल, अपने नाम पर रानीताल तथा अपने विश्वस्त दीवान आधारसिंह के नाम पर आधारताल बनवाया।
दुर्गावती ने 16 वर्ष तक जिस कुशलता से राज संभाला, उसकी प्रशस्ति इतिहासकारों ने की। अबुल फ़ज़ल ने लिखा है, दुर्गावती के शासनकाल में गोंडवाना इतना सुव्यवस्थित और समृद्ध था कि प्रजा लगान की अदायगी स्वर्णमुद्राओं और हाथियों से करती थीं। मालवांचल शांत और संपन्न क्षेत्र माना जाता रहा है, पर वहां का सूबेदार स्त्री लोलुप बाजबहादुर खान जो कि सिर्फ रूपमती से आंख लड़ाने के कारण प्रसिद्ध हुआ है, दुर्गावती की संपदा पर आंखें गड़ा बैठा। पहले ही युद्ध में दुर्गावती ने उसके छक्के छुड़ा दिए और उसका चाचा फतेहा खां युद्ध में मारा गया, पर इस पर भी बाजबहादुर की छाती ठंडी नहीं हुई और जब दुबारा उसने रानी दुर्गावती पर आक्रमण किया, तो रानी ने कटंगी-घाटी के युद्ध में उसकी सेना को ऐसा रौंदा कि बाजबहादुर की पूरी सेना का सफाया हो गया। फलत: दुर्गावती सम्राज्ञी के रूप में स्थापित हुईं।
इधर मुगल शासक अकबर भी गोंडवाना राज्य को जीतकर रानी को अपने हरम में डालना चाहता था। रानी दुर्गावती गोंडवाना के एक ऐसी रानी थी, इतिहास में जिन्हें न केवल उनके पराक्रम के लिए जाना जाता है, बल्कि उसके साथ साथ आने वाले कल में पर्यावरण और जल से संबंधित जीतनी समस्याएं खड़ी हो सकती है, उनके निराकरण की दृष्टि से भी उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। इस अवसर पर ग्राम बाड़ेगाँव के ग्रामवासियो ने भी रानी दुर्गावती की प्रतिमा में पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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