MP में 8 मंत्रियों के कट सकते हैं टिकट – अमित शाह ने प्रदेश के नेताओं को दिए संकेत; अंतिम फैसला मोदी ही लेंगे

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भोपाल। बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की उम्मीद रखने वाले नेताओं को उम्मीदवारों की चौथी सूची का इंतजार है। पार्टी हाईकमान ने 55 सीटों पर नाम लगभग फाइनल कर लिए हैं। इस सूची में 8 मंत्रियों के टिकट काटकर नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी है। इसके संकेत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश के बड़े नेताओं को दे दिए हैं। जिन मंत्रियों के टिकट कटने की आशंका है, उनमें से दो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर छोड़ा गया है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि मंत्रियों के टिकट कटने का फैसला उनकी छवि, जातिगत समीकरण और संगठन के फीडबैक पर होगा। 2018 के विधानसभा चुनाव में शिवराज सरकार के 27 में से 13 मंत्री चुनाव हार गए थे, जिसके चलते बीजेपी बहुमत (116 सीट) के आंकड़े से महज 7 सीटें कम रह गई थीं और उसे सत्ता से बाहर होना पड़ा था।
पार्टी इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है। यही वजह है कि तीन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल व फग्गन सिंह कुलस्ते, चार सांसद राकेश सिंह, गणेश सिंह, राव उदय प्रताप सिंह व रीति पाठक के अलावा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को विधानसभा चुनाव का टिकट दिया गया है।

सबसे पहले जानते हैं- वे 3 फैक्टर, जिनकी वजह से मंत्रियों के टिकट कटेंगे

  1. जनप्रतिनिधि की इमेज : विधायक की क्षेत्र में छवि कैसी है? उस पर कोई गंभीर आरोप तो नहीं है। जनता के बीच सक्रियता कितनी रही?
  2. संगठन का फीडबैक : विधायकों-मंत्रियों का संगठन से फीडबैक लिया गया है। जिला स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों की राय भी ली गई है।
  3. जातिगत समीकरण : प्रत्याशी चयन में विधानसभा क्षेत्र के जातिगत समीकरणों को भी महत्व दिया जा रहा है। ओबीसी बाहुल्य सीटों पर फोकस ज्यादा है।

कमल पटेल, महेंद्र सिंह सिसोदिया पर असमंजस

कृषि मंत्री व हरदा विधायक कमल पटेल और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री व बम्हौरी विधायक महेंद्र सिंह सिसोदिया की टिकट पर फिलहाल असमंजस है। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि इन पर फैसला होना बाकी है। कमल पटेल की दिल्ली तक शिकायतें पहुंची हैं, जबकि महेंद्र सिंह कई दिनों से विवादों में घिरे हुए हैं। बता दें कि खेल मंत्री एवं शिवपुरी विधायक यशोधरा राजे सिंधिया विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं।

सर्वे के बाद लिए गए 2 अहम निर्णय

  • उन पुराने नेताओं की जगह कुछ नए नेताओं को मौका देने का फैसला किया गया है, जिनके खिलाफ मतदाताओं में नाराजगी है।
  • जिन विधायकों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है, लेकिन पार्टी के पास बेहतर उम्मीदवार नहीं हैं, उन्हें चुनाव में उतारा जाएगा।

2018 में 5 मंत्रियों के टिकट कटे थे

बीजेपी ने 2018 में 5 मंत्रियों के टिकट काटे थे जबकि 2013 में 4 मंत्रियों को टिकट नहीं मिला था। पिछली बार माया सिंह, हर्ष सिंह, सूर्यप्रकाश मीणा, लक्ष्मीकांत शर्मा और गौरीशंकर शेजवार जैसे मंत्रियों को बीजेपी ने चुनाव नहीं लड़ाया था। 2018 में शिवराज कैबिनेट में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल 32 मंत्री थे, जिनमें से 27 ने विधानसभा चुनाव लड़ा था। इनमें से 13 मंत्री चुनाव हार गए थे, जबकि 14 अपनी सीट बचाने में सफल रहे थे।

2018 में ये 13 मंत्री हारे थे चुनाव

अर्चना चिटनिस (बुरहानपुर), जयंत मलैया (दमोह), रुस्तम सिंह (मुरैना), उमाशंकर गुप्ता (भोपाल दक्षिण पश्चिम), अंतर सिंह आर्य (सेंधवा), शरद जैन (जबलपुर उत्तर), दीपक जोशी (हाटपीपल्या), जयभान सिंह पवैया (ग्वालियर), नारायण सिंह कुश्वाहा (ग्वालियर पूर्व), ओमप्रकाश धुर्वे (शहपुरा, डिंडोरी), लाल सिंह आर्य (गोहद), ललिता यादव (बड़ामलहरा) और बालकृष्ण पाटीदार (खरगोन)।

गुजरात में 5 मंत्रियों के कटे थे टिकट, नए चेहरे जीते

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित पांच मंत्रियों के टिकट काटकर उन सीटों पर नए चेहरे मैदान में उतारे थे और सभी चुनाव जीत गए थे। बीजेपी इस फॉर्मूले को एमपी में आजमा सकती है। खास बात यह है कि इन मंत्रियों ने टिकट का फैसला होने से पहले ही चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा था कि वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। ऐसा एमपी में भी हो सकता है।

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