बैतूल में हैं असीम संभावनाएं, कृषि महाविद्यालय खोला जाए

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  • मप्र शिक्षक संघ ने सौंपा ज्ञापन

बैतूल। मप्र शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री के नाम से जिला प्रशासन को बैतूल जिले में कृषि महाविद्यालय की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस संबंध में संगठन के जिला अध्यक्ष सुरन्द्र कनाठे ने बताया कि 97 वर्ष पूर्व ब्रिटिश सरकार ने जिले की कृषि संभावनाओं को देखते हुए बैतूल बाजार में कृषि स्कूल की स्थापना की थी परन्तु आज लगभग सौ वर्ष पूर्ण होने वाले हैंजिले के हजारों बच्चे कृषि विषय से उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करते हैं लेकिन महाविद्यालय के अभाव में कृषि से स्नातक नहीं हो पाते हैं। हमारा भारत कृषि प्रधान देश है तो क्या प्रत्येक जिला स्तर पर कृषि महाविद्यालय नहीं हो चाहिए? बैतूल जैसी जैव विविधता एक मिसाल है। सचिव दिलीप गीते एवं अध्यक्ष शाहपुर बीआर ठाकरे ने बताया कि बैतूल जिले में फसल उत्पादन की बात करें तो गेंहू, सोयाबीन, गन्ना, चना, आम, आदि फसले बहुतायात में होती है। पूरे देश में बैतूल की जलवायु लीची के लिए सर्वोत्तम है, शोध किए जाएं तो अनेक औषधिय, मेवे और फलों की खेती की भी खेती को बढ़ावा मिल सकता है जिसके लिए महाविद्यालय की आवश्यकता है। अध्यक्ष भैंसदेही प्रमोद मानकर एवं अध्यक्ष बैतूल पवन फाटे ने बताया कि बैतूल बाजार स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र शासकीय कृषि माध्यमिक विद्यालय एवं बीज निगम ये तीनों संस्थाएं आपस में एक दूसरे से लगी हुई है एवं 135 एकड़ की मालिक हैं। 55 एकड़ भूमि ग्राम कढ़ाई में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के पास सुरक्षित है। इस प्रकार कुल 185 एकड़ भूमि कृषि महाविद्यालय हेतु उपलब्ध है। प्रारंभिक स्तर पर कृषि महाविद्यालय, कृषि यंत्र, शैक्षणिक कर्मचारी, बहुउद्देशिय हॉल, क्लासरूम, प्रयोग शाला, खेल मैदान आदि आवश्यक साधन संसाधन पूर्व से उपलब्ध है। सचिव आठनेर विक्रम इथापे एवं उपाध्यक्ष विट्ठलराव चरपे, कृषि महाविद्यालय की मांग डीडी उईके द्वारा लोकसभा मे भी बैतूल बाजार क्षेत्र में कृषि महाविद्यालय की मांग की गई है। संतोष मोहबे एवं श्याम परते ने कहा कि हमने मांग की है कि बैतूल जिले के गरीब छात्रों के हितों व कृषि की असीम संभावनाओं को देखते हुए 100 वर्ष पुराने कृषि विद्यालय बैतूल बाजार में कृषि महाविद्यालय खुलवाया जाए। इस अवसर पर अमोल पानकर, पंकज लोनारे, प्रदीप लोनारे, धमेन्द्र खवसे, सारंग पात्रिकर, मनोज पंवार आदि मौजूद थे। 

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