- इंटक यूनियन के पुराने लोगों के जाने से इंटक हुई कमजोर
सारनी। कोयलांचल क्षेत्र पाथाखेड़ा में भूमिगत खदानों में काम करने वाले श्रमिक संगठन के नेताओं का एक यूनियन से दूसरे यूनियन आने और जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहता है। लेकिन इस बार इंटक यूनियन के तवा वन खदान की पूरी कार्यकारिणी इंटक को छोड़कर कोयला श्रमिक सभा(एचएमएस)का दामन थाम लिया है। जिससे इंटक को बड़ा झटका लगा है।हालांकि डब्ल्यूसीएल स्तर पर पहले से ही इंटक दो भागों में बांट चुकी है। जिसमें एक ददई ग्रुप और दूसरा राजद्रे ग्रुप होने के कारण इंटक संपूर्ण कोल इंडिया के भूमिगत और ओपन खदानों में पहले से ज्यादा कमजोर हो चुके हैं। लेकिन कोयलांचल क्षेत्र पाथाखेड़ा में इंटक का एक वर्चस्व और दबदबा हुआ करता था लेकिन इंटक यूनियन के पदाधिकारियों की आपसी लड़ाई का खामियाजा अब इंटक यूनियन को भोगना पड़ रहा है। तवा वन खदान के पूरी कार्यकारिणी कोयला श्रमिक सभा यूनियन में चले जाने से इंटक यूनियन अब क्षेत्र में खत्म की कगार पर आकर खड़ी हो गई है। एचएमएस यूनियन के एरिया महामंत्री अशोक नामदेव ने बताया कि तवा वन की पूरी कार्यकारिणी का हम स्वागत करते हैं और पूरा प्रयास रहेगा कि संगठन की नीति और रीति के साथ मिलकर सभी पदाधिकारी पहले से बेहतर काम करेंगे हमारी यूनियन में उन्हें महत्वपूर्ण पद देने के अलावा उनकी सभी बातों को प्राथमिकता से सुनना और उसका समाधान करना यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यूनियन में शामिल होने वाले पदाधिकारियों मे महेंद्र यादव,मनोज मानकर सुमित अग्रवाल, शिवप्रसाद सोनी,कृष्णा बिनझाड़े,भीमराव गडकर,यशवंत देशमुख, सुनिल शुक्ल,शंकर पवार,सूरजीत सेन, दयाचंद,रघुनाथ माथनकर,सुरेश वाडेकर सहित 40 से अधिक लोगों ने इंटक को छोड़कर एचएमएस यूनियन में शामिल हो गए।
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