सोशल मीडिया पर किए जाने वाले प्रचार प्रसार पर निगरानी के लिए चुनाव आयोग के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिलों निगरानी टीमों का गठन किया गया है और कलेक्टरों को कहा गया है कि वे सोशल मीडिया में आचार संहिता के उल्लंघन से बचने के लिए हर संभव कोशिश करें। कलेक्टरों से कहा गया है कि रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों के साथ राजनीतिक दलों की बैठक कराएं और उन्हें बताएं कि मीडिया में आने वाले किस तरह के विज्ञापन की प्रक्रिया से वे आचार संहिता उल्लंघन के दायरे में नहीं आएंगे। राजनेताओं को बताएं कि उन्हें कैसे प्रि सर्टिफिकेशन की कार्यवाही पूरी कराना है।
यह जानकारी देना होगी परमिशन के लिए
प्री- सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन करने वाले प्रत्याशी या राजनीतिक दल को बताना होगा कि जो विज्ञापन दिया जा रहा है वह चैनल या न्यूज एजेंसी को कब दिया जाएगा और कितनी अवधि के लिए प्रकाशित किया जाएगा। साथ ही बताना होगा कि जो विज्ञापन दिया जा रहा है उसकी कास्ट क्या है। आयोग द्वारा निर्धारित फार्मेट में यह भी बताना होगा कि विज्ञापन की भाषा क्या होगा और उसकी विषय वस्तु क्या रहेगी।
इलेक्ट्रानिक मीडिया के मामले में आयोग की अनुमति के लिए मेन स्क्रिप्ट, सीडी, कैसेट सहित तीन दिन पहले आवेदन करना होगा। इसके बाद प्रि सर्टिफिकेशन होने के उपरांत इसे मीडिया के लिए प्रत्याशी या राजनीतिक दल जारी कर सकेंगे। आयोग के निर्देश में कहा गया है कि प्रिंट मीडिया में आने वाले प्रत्याशियों व राजनीतिक दलों के विज्ञापन में मतदान तारीख के 48 घंटे पूर्व तक प्रकाशित कराई जाने वाले विषय वस्तु का सर्टिफिकेशन कलेक्टर से कराना होगा।
इसके साथ ही ई पेपर में छपने वाली जानकारी का भी सर्टिफिकेशन इस बार कराना जरूरी कर दिया गया है। बताया जाता है कि जिला स्तर पर गठित की गई एमसीएमसी कमेटी की अब तक जो जिम्मेदारी तय है उसके अनुसार नामांकन होने तक प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया में आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित मामलों की जानकारी लेकर जांच और कार्रवाई के लिए कलेक्टर को भेजना होगी। इसके बाद प्रत्याशियों के पेड न्यूज और अन्य गतिविधियों की निगरानी करना होगी जिसमें आचार संहिता का उल्लंघन होता है।
रिटर्निंग और सहायक रिटर्निंग अफसरों की भूमिका महत्वपूर्ण
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने इसको लेकर प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि आयोग द्वारा जो भी दिशा निर्देश तय किए गए हैं। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इसकी जानकारी राजनीतिक दलों को बुलाकर देंगे और उसकी प्रक्रिया का पालन करने के लिए प्रि सर्टिफिकेशन व्यवस्था पर अमल करेंगे।
+ There are no comments
Add yours