• 24 घंटे का निर्जल उपवास करती हैं महिलाएं

सारनी। उत्तरभारती महिलाओं के माध्यम से 24 घंटे का निर्जला उपवास करके बड़े हर्ष उल्लास के साथ जितिया पर्व मनाने का कार्य किया गया। यह जितिया पर्व संतान की दीर्घायु के लिए महिलाएं मानती है। बताया जाता है कि इन दिन महिलाएं अपने संतान की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन के लिए 24 घंटे का निर्जला उपवास करती है हर साल अश्वनी माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जीवित्पुत्रिका का व्रत किया जाता है।धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जितियां व्रत को करने से संतान दीर्घायु होती है। और उन पर आने वाला हर संकट टल जाता है। महिलाएं सामूहिक रूप से अपने घर आसपास के नदियों के समक्ष एकत्रित होकर भोजपुरी में गीत गाकर अपने पुत्र की दीर्घायु की प्रार्थना करते दिखाई दी। उत्तर भारतीय क्षेत्र के रहने वाले महिला पुरुषों के माध्यम से 14 फाटक के समक्ष तवा टू मार्ग की पुलिया के नीचे बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित होकर नदी में स्नान करने के बाद जितिया व्रत हर्ष उल्लास के साथ मनाने का कार्य किया गया। उत्तर भारतीय महिलाओं के माध्यम से जितियां का जो व्रत रखा जाता है उसके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उदय तिथि के अनुरूप जीवित्पुत्रिका का व्रत इस बार 6 अक्टूबर को ही रखा जाएगा अष्टमी तिथि 6 अक्टूबर यानी कि शुक्रवार सुबह 6:34 से शुरू हो गया है और तिथि का समापन 7 अक्टूबर को सुबह 8:08 पर होगा इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 तक रहेगा। शनिवार को व्रत की महिलाओं के पारन के साथ यह व्रत समाप्त होगा।

By Vishal

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