मृत बाघ की गर्दन काटकर ले गए थे आरोपी, अरेस्ट

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  • बाघ के दांत से ताबीज बनाना चाहते थे, इसलिए कुल्हाड़ी से काटी गर्दन

बैतूल। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व चूरना रेंज में पिछले दिनों हुए बाघ के शिकार कर गर्दन काटकर ले जाने वाले आरोपी अरेस्ट हुए हैं। शव मिलने के 18वें दिन सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम ने शिकारियों को गुरुवार सुबह गिरफ्तार किया। शिकार के तीनों आरोपी बैतूल जिले के ग्राम धांसई के निकले। एक आरोपी मृतक अनीश उइके भी है। जो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना में प्रायवेट जिप्सी चलाता था। बाघ के शिकार को लेकर की पूछताछ के बाद 2 जुलाई को आरोपी अनीश फांसी लगाकर सुसाइड कर चुका है। मृतक अनीश उइके और कमल कुमरे ने मिलकर मृत बाघ की गर्दन काटकर ले गए थे। गर्दन को आरोपियों ने एक तालाब में पन्नी में बांधकर छिपा डाल दिया था। आरोपी बाघ के केनाइन दांत से ताबीज और गर्दन को तंत्रमंत्र में उपयोग कर ताकत पाना चाहते थे।

गुरुवार को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर संदीप फैलोज के नेतृत्व में आरोपी कमल पिता धान सिंह कुमरे और शुबन पिता शंकर भलावी दोनों निवासी धांसई माल को गिरफ्तार किया। टीम ने कुल्हाड़ी औरअ एक टाइगर के केनाईन दांत भी जब्त किया है। आरोपी कमल ने बताया कि डबरादेव बीट में मैंने और अनीश ने बाघ मृत अवस्था में देखा था। मृत बाघ नाले में पड़ा था। हमने योजना बनाकर दो दिनाें बाद जंगल में पहुंचे। कुल्हाड़ी से बाघ की गर्दन को काटी। फिर उसे गांव के पास पन्नी में गर्दन डालकर पानी में छिपा दी थी। आरोपी कमल ने शुबन भलावी को सारा घटनाक्रम बताया था। दोनों आरोपियों को गुरुवार शाम को एसटीआर की टीम नर्मदापुरम न्यायालय कोर्ट पेश किया। जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

बता दें कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत परिक्षेत्र चूरना में 25 जून को डबरादेव बीट में नर बाघ मृत मिला था। बाघ के शव में से गर्दन सहित सिर नहीं पाया गया। मामले में वन विभाग ने केस दर्ज कर शिकारियों की तलाश शुरू की।मामले में क्षेत्र संचालक एल कृष्णमूर्ति के निर्देशन में टीम बनाई गई। टीम में उपसंचालक संदीप फैलोज, सहायक संचालक राजीव श्रीवास्तव, परिक्षेत्र अधिकारी तवा निशांत डोसी, परिक्षेत्र अधिकारी चूरना पाठक, उप वनक्षेत्रपाल राजेन्द्र मिश्रा, वनरक्षक निशांत, प्रशांत सिंह, नारायण लोधी, सुश्री दिव्या किसपोट्टा, गंगा ठाकुर, नेहा चौधरी, दयानंद यादव सुरक्षा श्रमिक और एसटीएफ टीम द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी सक्रिय भूमिका निभाई गई।

सुसाइड के बाद डर में फेंकी थी खोपड़ी

एसडीओ राजीव श्रीवास्तव ने बताया बाघ के शिकार के बाद पूछताछ व जांच पड़ताल शुरू की। जंगल में आने-जाने वाले कर्मचारी व प्रायवेट जिप्सी चालक व गाइड से भी पूछताछ की जा रही थी। आरोपी अनीश तंत्रमंत्र पडिहारी करता था व चूरना रेंज में प्रायवेट जिप्सी चलाता था। इसलिए उसे भी पूछताछ के लिए लाया गया था। सवाल पूछने पर अनीश गुमशुम था व चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। 1 जुलाई की रात को ही उसे छोड़ दिया गया। 2 जुलाई की रात को अनीश का शव खेत में जाम के पेड़ पर लटका मिला था। जिसके बाद हमारी जांच ग्राम धांसई माल पर ही टिक गई। 2 डाक स्क्वार्ड व टीम द्वारा गांव में चैकिंग बढ़ाई। 6 जुलाई को गांंव से थोड़ी दूर बाघ की खोपड़ी को कुत्ते खाते मिले। जांच के दौरान पहले एक की मौत और बाघ की गर्दन मिलने से हमें यकीन हुआ कि शिकारी इसी गांव के है। थोड़ी ओर पूछताछ कि तो कमल और शुबन भलावी ने जुर्म स्वीकार किया। डर के कारण उन्होंने गर्दन नाले के रपटे पर फेंकने स्वीकार किया।

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