सारनी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मी, पुलिस विभाग, अनेक विभागो को  ओर हाल ही में पत्रकारिता जगत को भी फ्रंट लाइन का मानते हुये कोविड-19 की सुविधाये दी जा रही है। फिर बिजली विभाग से भेदभाव क्यो? मध्य प्रदेश यूनाइटेड फोरम फार एमपलाइज एंड इंजीनियर्स  के प्रान्तीय संयोजक वी के एस  परिहार ने बताया मध्यप्रदेश में कोविड-19 से संक्रमित लगभग 350 विद्युत अधिकारी कर्मचारी वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। लगभग दो हजार से अधिक पूरे मध्यप्रदेश में विद्युत अधिकारी कर्मचारी आउटसोर्सिंग श्रमिक  कोविड-19 बीमारी से संक्रमित है। फोरम लगातार मध्यप्रदेश शासन से पत्राचार कर रहा है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर को फोरम ने 8 अप्रेल पत्र  लिखकर बिजली कर्मचारी एवं अधिकारीयो को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन की मांग की गई थी। लेकिन अभी तक सरकार ने बिजली विभाग को फ्रंट लाइन का दर्जा नहीं दिया है, ओर न ही कोई ध्यान दिया गया है। वितरण कंपनियां हो या जनरेटिग कंपनी विद्युत अधिकारी कर्मचारियों में भय का वातावरण है। मध्य प्रदेश मे  आगामी समय में विद्युत व्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यूनाइटेड फोरम जनरेशन सारनी के प्रचार सचिव अंबादास सूने ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय भोपाल के पत्र दिनांक 20 अप्रैल 21 का भी पालन नहीं किया जा रहा है।  ऐसी स्थिति  पिछले कोरोना काल में नहीं थी। प्रचार सचिव ने बताया कि फोरम के संयोजक वी के एस परिहार ने पुनः मुख्यमंत्री को पत्र 175/2021 3 मई को लिख कर बिजली कर्मचारी एवं अधिकारीयो के साथ आउट सोर्स को मुख्यमंत्री कोविड योजना का लाभ दिया जाए।

By Vishal

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