सारनी। ग्राम भारती महिला मण्डल शोभापुर कालोनी के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वसहायता समुह की महिलाओं को रोजगार एंव स्वरोजगार से जोडने हेतु स्वसहायता समुह की महिलाओं का रोजगार सम्मेलन आयोजित किया गया। शुक्रवार को राज्य से पधारे महेश वामनकर राज्य परियोजना प्रबंधन आजीविका संवर्धन तथा धन्नजय सहायक राज्य परियोजना प्रबंधक आजीविका संवर्धन के मुख्य अतिथि तथा सतीश पवार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जिला परियोजना प्रबंधक बैतुल के विशेष आतिथ्य में सर्वप्रथम संस्था कार्यालय शोभापुर कालोनी में संस्था द्वारा क्षमतावर्धन हेतु विभिन्न प्रशिक्षण का आयोजन किया जाता हैं।

प्रशिक्षण दौरान प्रतिभागियों द्वारा निर्मित सामग्री सेरामिक कार्य जुटवर्क, कुशन, फोमरजाई, विभिन्न प्रकार के अचार, आवले की टेस्टी सुपारी, मुरब्बा, आदि को प्रर्दशनी लगाकर प्रदर्शित किया गया। प्रर्दशनी अवलोकन पश्चात् संस्था द्वारा अतिथी सम्मान किया गया। तदपश्चात अतिथि द्वारा स्वसहायता समुह के साथ किस प्रकार कार्य कर अपने उद्बोधन में बतलाया सतीश पवार ग्रामीण आजीविका मिशन जिला परियोजना प्रबंधक बैतुल द्वारा स्व सहायता समूह को आत्मनिर्भर बनाने के लिये ग्राम भारती महिला मंडल एवं आजीविका मिशन दो चक्के है। जिन्हें साथ में चलना है और उन्हें रोजगार से जोडना हैं।

संस्था कार्यालय के पश्चात् राज्य एवं जिले की टीम ग्राम फूलबेरिया में स्वसहायता समूह द्वारा हाथ से बनाई सामग्री जिसमें विभिन्न प्रकार के बैग, मेकरम तथा ऊन से बनी सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। संस्था द्वारा नाबार्ड के सहयोग से 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया था। आज वह स्वरोजगार कर रही हैं। जिन्हें बैगों के आर्डर मिलते जा रहे हैं। वर्तमान तक 5000 बैग के आर्डर मिल चुके हैं। जिसका अवलोकन किया गया महेश एवं धन्नजय द्वारा महिलाओं को किस प्रकार संगठन कार्य करता हैं, जानकारी दी गई। यहां लगभग 100 महिलायें उपस्थित थी।

फूलबेरिया के पश्चात् ग्राम चौपना 2 के रेस्ट हाउस में बंगाली कैम्प के 36 गांवों के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वसहायता समूह की अध्यक्ष एवं सचिव तथा कुछ अन्य सदस्य इस प्रकार लगभग 450 महिलायें उपस्थित थी। प्रत्येक गांव में 4 से 5 समूह बने हुये इसी तारतम्य में संस्था लगातार समूह बना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से पंजीकृत करा रही हैं। यहां राज्य एवं जिले के अधिकारियों द्वारा ग्राम संगठन कैसे बनता हैं। किस प्रकार राशी खाते में आती हैं। कार्य योजना समझाई गई।

समूह की महिलाओं को प्रातः उठते से रात्री सोते समय क्या लगता हैं। उसका अवलोकन कर छोटी-छोटी वस्तूयें जिन्हें हम संगठन के माध्यम से बना सकते हैं। उद्बोधन में समझाया कार्यक्रम में आये अतिथियों द्वारा संस्था के कार्यों की प्रशंसा की गई। कार्यक्रम में संगठन की शक्ति देखने को मिली जो बधाई की पात्र हैं। प्रशिक्षण प्राप्त स्वसहायता समूह की दीदीयां आजीविका गतिविधी से जुडकर आत्म निर्भर होने के लिये तैयार हैं। संस्था द्वारा आयोजित स्वसहायता समूह का सम्मेलन कारगार सिद्ध होगा यहां खुला मंच था, समूह की महिलाओं
द्वारा अपने अपने विचार व्यक्त किये तथा क्या करना चाहती हैं। जानकारी दी गई समूह द्वारा संस्था के साथ जुडकर 15 वर्ष पूर्व का अनुभव प्रस्तुत किया। भारती अग्रवाल ने बतलाया कि समूह की इच्छा शक्ति होने पर ही समूह कार्य करने में सक्षम होगा। आप आगे बढ़े हम साथ देने के लिये तैयार हैं। समूह की महिलाओं को निः शुल्क संस्थागत प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा हैं कार्यक्रम में चन्द्रबली ढ़ाकरे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विकासखंड प्रबंधक घोड़ाडोगरी तथा संस्था नंदा सोनी, ज्योति बागडे, शबनम शेख, आरजू अंसारी, पल्लवी पोडफोडे, अविनाथ माकोडे, लीलाधर दवंडे, प्रदीप विश्वास, राजू रावत, सुनिल दरवाई, धनराज गंगारे, मनोज यदुवंशी द्वारा कार्यक्रम में सहयोग प्रदान किया।

By Vishal

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