- कार्यकाल बढ़ने से सरपँच पति और ठेकेदारों ने खूब मारी मलाई अब 50 लाख से अधिक बची हुई राशि मे है गिद्ध नजर
घोड़ाडोंगरी। घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत के नगर पंचायत बनने के बाद घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत के काले कारनामे दिन पर दिन बाहर आ रहे है ऐसे ही एक मामले में अधिकारीयो की घोर लापरवाही सामने आई है अधिकारीयो की लापरवाही के कारण कार्यकाल बढ़ने से घोड़ाडोंगरी के ग्राम प्रधान के पति और कथित ठेकेदारों ने ग्राम पंचायत की राशि की खूब बंदरबाट कर जमकर मलाई मारी और पूरे नियम कानून को ताक में रखकर फर्जी बिल लगाकर जमकर लूटमार मचाई जबकि नियमानुसार पँचायत से नगर पंचायत बनने पर सरपँच का कार्यकाल नही बढ़ाया जाता मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंग चौहान ने घोड़ाडोंगरी को नगर पंचायत का दर्जा दिया था कोरोना महामारी के कारण पूरे मध्यप्रदेश में पँचायत चुनावो को आगे बढ़ाते हुए सभी पंचायतो का कार्यकाल बड़ा दिया गया था और सभी पंचायतो में सरपंचों को ही ग्राम प्रधान के रूप में बना कर आगे कार्यकाल बड़ा दिया गया इसी दौरान घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपँच का कार्यकाल बड़ा कर प्रधान बना दिया गया था जबकि नियम अनुसार जहाँ भी पंचायतो को नगर पंचायत का दर्जा मिलता है वहाँ सरपंचों का कार्यकाल नही बढ़ाया जाता लेकिन घोड़ाडोंगरी में अधिकारीयो ने जानकारी के अभाव में घोड़ाडोंगरी में भी सरपँच का कार्यकाल बड़ा कर ग्राम प्रधान का दर्जा देकर उन्हें वित्तीय अधिकार के सभी अधिकार सौप दिये जो एक सरपँच को रहते है अब जब पूरे अधिकार ग्राम प्रधान को मिल ही गए तो इस मौके का भरपूर फायदा उठाकऱ वर्षो से पँचायत में ठेकेदारी कर रहे ठेकेदार एवम दलालों ने ऐसी बंदरबाट मचाई की कोरोना काल से अभी तक कचरा गाड़ी,एवम अन्य कार्यो के नाम पर लाखों का माल अंदर कर लिया और मनमाने तरीके से फर्जी बिल लगाए गए साथ ही ठेकेदार की मनमानी इतनी बढ़ गई कि बिना स्वीकृति के शासन की भूमि पर 9 लाख रुपये की लागत से एक स्टापडेम का काम धड़ल्ले से चालूकर उसमें भी भारी हेराफेरी करने की पूरी तैयारी कर ली है नगर पँचायत के सीएमओ श्री अक्षत बुंदेला ने सीएमओ का प्रभार लेने के बाद घोड़ाडोंगरी पँचायत में 50 लाख से ऊपर बची हुई राशि को तत्काल अपने अधिकार में लेकर बंदरबाट रुकवाने की पूरी कोशिश की लेकिन उसके बाद भी कथित ठेकेदार अभी भी इधर उधर हाँथ पर मारकर राशि को हजम करने की जुगत में लगे हुए है इसके पहले जिस तरीके से मौके का फायदा उठाकर सरपँच पति और ठेकेदार ने शासन को लाखों का चूना लगाया है इससे कही न कही प्रश्नचिन्ह लग गया है कि इस पूरे मामले में आखिर कौन है जो इस तरह की गतिविधियों को संरक्षण देकर ग़रीबी के हितों का हनन कर रहे है|