- मासिक धर्म के दिनों में जमीन पर सोती है महिलाएं
- महिला सेल और सशक्त सुरक्षा बैंक ने चलाया जागरूकता अभियान
बैतूल। 1 से 5 वर्ष के मासूम बच्चे दिन भर यहां अटखेलियां करते है। युवतियां घर के कामों में हाथ बटाती है और महिलाएं कभी साईंबाबा का रथ लेकर तो कभी हाथ में भगवान की फोटो लेकर शहर में आस्था के नाम पर गुजारे के लिए धन संग्रह करती है। पिछले एक वर्ष से बडोरा मंडी के पीछे आधा सैकड़ा से अधिक परिवार रह रहे है। यहां रहने वाला पुरूष ज्योतिषि का कार्य करते है। आज के समय में जब हर व्यक्ति के लिए शिक्षा जरूरी मानी गई। ऐसे में 50 परिवारों की इस बसाहट में एक भी व्यक्ति पढ़ा लिखा नहीं है। यह तस्वीर जिला मुख्यालय के करीबी बडोरा की है। मासिक धर्म के दिनों में सौ फीसदी महिलाएं परंपरागत साधनों पर आश्रित है। सोमवार को महिला सेल प्रभारी एसआई कविता नागवंशी, सशक्त सुरक्षा बैंक की संस्थापक गौरी पदम एवं संयोजक नीलम वागद्रे इस बसाहट में पहुंची और महिलाओं एवं बच्चों को कानूनी जानकारी दी। इस दौरान महिलाओं को मासिक धर्म के दिनों में भी अपनी सेहत का ध्यान रखने और परंपरागत साधनों का उपयोग न करने की समझाईश दी गई। महिला सेल प्रभारी कविता नागवंशी ने अपराधों को प्रति जागरूक करने एवं आवश्यकता पडऩे पर जरा सी सावधानी पुस्तिका में लिखे गए नंबरों की जानकारी देते हुए पुस्तिका बसाहट के लोगों को दी। इस दौरान एसआई नागवंशी ने बच्चों को भी गुड टच और बैड टच की जानकारी दी। साथ ही युवतियों को समझाईश दी कि किसी भी प्रलोभन में न आए। यदि कोई आपके साथ गलत व्यवहार करता है तो तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दे।
एक भी बच्चा नहीं जाता स्कूल
महाराष्ट्र के अमरावती, नागपुर, वर्धा, वरूड़ सहित अन्य जिलों के करीब 50 परिवार एक वर्ष से बडोरा मंडी के पीछे गुमठियां बनाकर निवास कर रहे है। सोमवार को जब महिला सेल प्रभारी कविता नागवंशी और सशक्त सुरक्षा बैंक की टीम इस बसाहट में पहुंची तो महिलाओं एवं युवतियों से वहां सुरक्षा को लेकर चर्चाएं की। महिलाओं को किसी भी तरह की असुविधा, छेड़छाड़ या असामाजिक तत्वों का डर होने पर तत्काल डॉयल-100 पर कॉल करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान यह बात भी सामने आई कि 50 परिवारों की बसाहटों में एक भी व्यक्ति पढ़ा, लिखा नहीं है। वर्तमान में इस बसाहट में 50 से अधिक बच्चे है जो न आंगनवाड़ी जाते है और ना ही स्कूल। यहां निवास कर रही 15 से 25 वर्ष की युवतियों ने भी चर्चा में बताया कि उन्होंने कभी स्कूल नहीं देखा। एक दो युवतियों को अपना नाम लिखना आता है। महिलाओं ने बताया कि बच्चों को स्कूल भेजना इसलिए भी संभव नहीं है, क्योंकि उनका कब कहां होंगे यह ठिकाना नहीं रहता। एक वर्ष पहले वे बैतूल में रोजी रोटी की तलाश में आए थे। होली के समय घर वापस जाना था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से यही फंस गए। अब दीपावली पर ये परिवार अपने घर लौटेंगे और पुन: एक महीने बाद बैतूल वापस आ जाएंगे।
यहां भी देखने मिली मासिक धर्म की कुरूतियां और अंधविश्वास
झोपडिय़ा बनाकर रह रहे परिवारों में भी मासिक धर्म को लेकर कई कठोर नियम है। महिलाओं एवं युवतियां मासिक धर्म के दिनों में जमीन पर बोरियों का फट्टा बिछाकर सोती है, उन्हें में घर की वस्तुओं को छूने की मनाही होती है। यदि उन दिनों में कोई बच्चा छू लेता है तो उसे तत्काल नहलवाया जाता है। कई बार बच्चों को नए कपड़े पहनाकर रखते है। यहां मान्यता है कि नए कपड़े से सूतक नहीं लगता। अभाव में जी रहे इन परिवारों की स्थिति दयनीय है। सशक्त बैंक की टीम ने इन महिलाओ को मासिक धर्म के दिनों में सुविधाजनक स्थिति में रहने की समझाईश दी। साथ ही परंपरागत साधन कपड़े का उपयोग न करते हुए सेनेटरी पैड उपयोग करने प्रेरित किया गया। महिलाओं एवं युवतियों को सेनेटरी पैड भी वितरित किए गए।
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