सारनी। भारत वर्ष के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 तारीख को देश की 42 कोयला खदानों को देशी विदेशी इजारेदारो को देने हेतु घोषणा कर दी है। जिसके विरोध में देश के कोल इंडिया में कार्यरत सभी 2.73 लाख श्रमिको ने 3 दिवसीय पांच सूत्रीय मांगो को लेकर हड़ताल करने का नोटिस भारत सरकार को दे दिया है। इस हड़ताल को देश के 10 प्रमुख राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मोर्चा, राष्ट्रीय बिजली संगठन के कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, कोल इंडिया ऑफिसर एसोसिएशन संगठन, इनमोसा, स्टील फेडरेशन ऑफ इंडिया के श्रमिक संगठन, पेट्रोलियम एंड गैस वर्कर फेडरेशन ऑफ इंडिया आदि ने हड़ताल का उक्त तीन दिवसीय हड़ताल का समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इसका अलावा संपूर्ण राष्ट्र के करीब 193 देशों के संगठन संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने दिनांक 26 जून को घोषणा की नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड -19 रिकवरी प्लान के अन्तर्गत यह कोयला खदानों का निजीकरण करना एवं एफडीआई को लागू करना उचित नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं (आई एम डब्लयू एफ) फेडरेशन एटक के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ कृष्णा मोदी ने उक्त होने वाली 3 दिवसीय हड़ताल के संबंध में बताया है कि आजतक विदेशो में एवं अपने भारत वर्ष में पिछली होने वाली हड़तालों पर आजतक इतना समर्थन नहीं मिला है तथा कोल इंडिया के ऑफिसरों के एसोसिएशन के अलावा कोल इंडिया में कार्यरत सभी श्रमिक संगठनों के द्वारा होने वाली हड़ताल को एक ऐतिहासिक हड़ताल बताते हुए सभी कार्यरत कोयला श्रमिको से अपील की है उक्कत तीनों दिन जीरो उत्पादन जीरो डिस्पैच करते हुए अपनी इस होने वाली ऐतिहासिक हड़ताल को कामयाब बनाएंगे तथा भारत सरकार से आग्रह है कि समय रहते निम्न मांगो की पूर्ति की घोषणा करेंगे।