- रात 12 बजे चोरों ने की खदान से निकलने की कोशिश, पुलिस को देख अंदर भागे
सारनी। वेकोलि की खदानों में चोरी की घटना कोई नई बात नहीं है इससे पहले भी चोरी की घटनाएं लगातार घटित होती रही है लेकिन वेकोलि प्रबंधन ने आज तक चोरी के मामले को गंभीरता से ना लेकर इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया जिसका नतीजा है कि आए दिन कोयला खदानों में चोरी की घटनाएं घटित होती रहती है। जबकि सुरक्षा की दृष्टि से वेकोलि की खदानों पर ना तो सीसीटीवी कैमरा मौजूद है नाही सुरक्षा प्रहरियों की संख्या ज्यादा है। जबकि बदमाश हथियारों से लैस होते हैं। पूर्व में भी बदमाशों द्वारा ऐसी कई घटनाओं को अंजाम दिया गया है। लेकिन वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड प्रबंधन ने चोरी की वारदातों को रोकने के लिए कोई ऐसे कदम आज तक नहीं उठाए जिसका नतीजा है कि आज चोरों के हौसले बुलंद है और खदानों में आए दिन चोरी की वारदात बढ़ रही है। वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा की तवा-1 खदान में घुसे चोर 40 घंटे बाद भी बाहर नहीं निकले। जिसके बाद सारनी थाना प्रभारी रत्नाकर हिग्वें,सहायक उप निरीक्षक मुजफ्फर हुसैन,वेकोलि सुरक्षा अधिकारी जीवन चौहान अपने दो सुरक्षा प्रहरी साथ लगभग शाम छह बजे एक बार फिर सर्चिंग अभियान पर गए ताकि इस बात का स्पष्ट खुलासा हो सके खदान में चोर मौजूद हैं या नहीं,अगर खदान में चोर मौजूद है तो इससे खदान प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। दरअसल खदान के अपर सिम में ऑक्सीजन की कमी है और यहां चोरों का पहुँचना खतरों से खाली नहीं है। ऐसे में प्रबंधन का चिंतित रहना जायज है। हालांकि खदान प्रबंधन द्वारा मीडिया से खुलकर कुछ नहीं कहा जा रहा। लेकिन सर्चिंग टीम को खदान के भीतर कटे-छिले हुए केबल के टुकड़े, फुट प्रिंट, कपड़े, जूते और 21 लेवल में स्टॉपिंग टूटी मिली। यह सब चोरों के खदान के भीतर होने के सबूत है। इसीलिए खदान के भीतर कोल कर्मियों को पूरे सुरक्षा इंतजामात के साथ उतारे जा रहे हैं। सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे चोरों को देखा गया। इसके बाद रात 12 बजे चोरों ने खदान से निकलने की कोशिश की। लेकिन सुरक्षा और पुलिस टीम को देख अंदर भाग गए। गौरतलब है कि रविवार रात करीब 12 बजे 4 चोरों के खदान में घुसे होने की बात सामने आई थी। मौके का फायदा उठाकर 2 चोर भाग निकले। जबकि दो या इससे अधिक चोरों के खदान में मौजूद होने के कई सबूत मिले। अब तक खदान के भीतर सर्चिंग करने वेकोलि सुरक्षा विभाग की टीम, पुलिस टीम और रेस्क्यू टीम के अलावा कई अधिकारी पहुँच चुके हैं। खासबात यह है कि जितनी भी टीमें अब तक खदान के अंदर चोरों को तलाशने पहुँची है। कोई भी टीम 3-4 घंटे से पहले बाहर नहीं आई। दरअसल खदान की लंबाई करीब 4.5 किलोमीटर है। जिसमे दो सेक्शन, मेन डीप और डब्ल्यू-सेवन है। खदान के अंदर तीनों पालियों में रोज लगभग 550 कर्मी कार्य करते हैं। इस कोयला खदान से प्रतिदिन 1000-1200 तन कोयला उत्पादन होता है।
सुबह और रात में पहुँचे एसडीओपी
सुरक्षित कोयला उत्पादन के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी भूमिगत तवा-1 कोयला खदान में चोरों के घुसने की घटना से स्थानीय पुलिस पर भी जबरदस्त दबाव है। घटना दिनांक की पहली सुबह और रात में एसडीओपी रोशन कुमार जैन खदान पहुँचे और आवश्यक निर्देश दिए। वहीं चौकी प्रभारी रवि शाक्य अधिकांश समय खदान पर रहकर नजर बनाए हुए हैं। जबकि अलग अलग टीम सर्चिंग के लिए खदान में उतरी जा रही है। गौरतलब है कि पुलिस ने पिछली बार इसी खदान से 6 बदमाशों को पकड़कर बाहर लाया था। इससे पुलिस को पूरी उम्मीद है कि अगर चोर खदान में है तो उसे पकड़ लिए जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से खदान में सीसीटीवी कैमरे और गनमैन की कमी है।
आज भी सर्चिंग कर सकती है रेस्क्यू टीम
भूमिगत कोयला खदान में बिना सुरक्षा इंतजामात चोर ज्यादा समय नहीं रह सकते। दरअसल कोयला झड़ाने से खदान के अंदर मीथेन गैस निकलती है। जबकि कई स्थानों पर पर्याप्त हवा भी नहीं है। ऐसे में मंगलवार को दोबार रेस्क्यू टीम चोरों को तलाशने सुरक्षा इंतजाम के साथ खदान में उतरने से इनकार नहीं कर सकते।
इनका कहना है…
वेकोलि सुरक्षाकर्मी संजय वटके की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध 457, 380 के तहत अपराध दर्ज किया है। रात और दोपहर में पुलिस ने खदान में उतरकर सर्चिंग की है।
रवि शाक्य, चौकी प्रभारी पुलिस पाथाखेड़ा
चोरों के खदान में घुसने की सूचना मिली है पर अभी तक उनको देखा नहीं गया है। फिर भी रेस्क्यू टीम खदान के अंदर उतारी गई है।
एम सत्यनारायण
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