- कम पानी वाली फसलों चना, मसूर एवं सरसों के लिए किसानों को किया जाएगा प्रेरित
- संभावित जल स्थिति को लेकर पहले से की जाएगी तैयारी
- जलाशयों में उपलब्ध पानी का गाइडलाइन अनुसार पेयजल एवं सिंचाई के लिए होगा उपयोग
बैतूल। जिले में काफी वर्षों के बाद इस वर्ष अल्पवर्षा के कारण जलाशयों में अपेक्षाकृत कम जलभराव की स्थिति को देखते हुए पेयजल, सिंचाई एवं फसल प्रबंधन को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में जल उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा करते हुए आगामी समय में पेयजल एवं सिंचाई व्यवस्था तथा किसानों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री दुर्गादास उईके, विधायक बैतूल श्री हेमंत खंडेलवाल, विधायक आमला डॉ. योगेश पंडाग्रे, विधायक भैंसदेही श्री महेंद्र सिंह चौहान, मुलताई विधायक श्री चंद्रशेखर देशमुख, घोड़ाडोंगरी विधायक श्रीमती गंगा सज्जन सिंह ऊईके, जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्य श्री सुधाकर पवार तथा कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, सीईओ जिला पंचायत श्री गणेश जायसवाल सहित जल संसाधन, कृषि, जल निगम एवं एमपीईबी विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
गाइडलाइन के अनुसार होगा जल का उपयोग
बैठक में जलाशयों में उपलब्ध पानी की स्थिति की समीक्षा के बाद तय किया गया कि उपलब्ध जल का उपयोग निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। जिन जलाशयों में 50 प्रतिशत से कम जलभराव है, उनमें उपलब्ध पानी पेयजल एवं निस्तारी के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। वहीं 50 से 80 प्रतिशत जलभराव वाले जलाशयों से सिंचाई के लिए किसानों को एक पलेवा एवं एक पानी दिया जाएगा। 90 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाले जलाशयों से सिंचाई के लिए दो पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि दिसंबर माह के बाद जलाशयों में उपलब्ध पानी को मुख्य रूप से पेयजल की आवश्यकता के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
अधीक्षण यंत्री जल संसाधन विभाग श्री विपिन वामनकार ने बताया कि जिले में लगभग 200 जलाशय हैं, जिनमें से 127 जलाशय पूरी तरह खाली हैं। जिले के 200 जलाशयों की कुल जल संग्रहण क्षमता लगभग 472 एमसीएम है, जबकि वर्तमान में इनमें लगभग 242 एमसीएम पानी उपलब्ध है।
कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने पर जोर
केंद्रीय मंत्री श्री दुर्गादास उईके ने कहा कि अल्पवर्षा की स्थिति को देखते हुए पेयजल, सिंचाई एवं फसल प्रबंधन के लिए पुख्ता कार्ययोजना के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करते हुए किसानों और आमजन की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए। उन्होंने किसानों को कम पानी में होने वाली फसलों की ओर प्रेरित करने तथा इसके लिए गांव स्तर पर जागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए।
विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों के चयन के लिए प्रेरित किया जाए, जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कृषकों को गेहूं की अपेक्षा चना, सरसों, मसूर, अलसी सहित कम पानी में उपयुक्त फसलों की बुवाई को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए।
गेहूं का रकबा कम, चना एवं सरसों का रकबा बढ़ने की संभावना
उर्वरक-बीज की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की समीक्षा के दौरान विधायक श्री खंडेलवाल ने किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक एवं बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आनी चाहिए। कृषि विभाग द्वारा विशेष ग्राम सभाओं एवं किसान संवाद बैठकों के माध्यम से किसानों को कम वर्षा की स्थिति में फसल चयन, उपलब्ध जल के समुचित उपयोग, सिंचाई प्रबंधन एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश दिए गए।
उप संचालक कृषि श्री राम गोपाल रजक ने बताया कि इस सीजन जिले में गेहूं का रकबा लगभग 80 हजार हेक्टेयर कम होने की संभावना है। वहीं चने का रकबा 47 हजार हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 94 हजार हेक्टेयर तथा सरसों का रकबा 13 हजार हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 25 हजार हेक्टेयर होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि जिले में खाद, बीज एवं कीटनाशक की पर्याप्त उपलब्धता है।
रबी सीजन में सुचारू बिजली आपूर्ति के निर्देश
एमपीईबी विभाग की समीक्षा के दौरान रबी सीजन में किसानों को सुचारू बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पेयजल आपूर्ति के लिए आवश्यक बिजली व्यवस्था निर्बाध रखने तथा जले हुए ट्रांसफार्मरों को समय पर बदलने के निर्देश दिए गए।
संभावित पेयजल संकट वाले क्षेत्रों में पहले से की जाएगी तैयारी
पीएचई विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में संभावित पेयजल संकट वाले क्षेत्रों एवं ग्रामों को चिन्हित कर विधानसभा-वार जानकारी तैयार करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को जल स्रोतों की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जल निगम के अधिकारियों को मेंढा एवं वर्धा परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं घोघरी एवं गढ़ा परियोजनाओं को दिसंबर माह तक प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जल संसाधन एवं पीएचई विभाग के समन्वय से सारणी स्थित सतपुड़ा डेम से घोड़ाडोंगरी क्षेत्र के ग्रामों तथा पारसडोह डेम से आमला ब्लॉक के ग्रामों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जल निगम के संबंधित अधिकारियों को दिए गए। बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अल्पवर्षा के कारण उपलब्ध जल की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अभी से समुचित प्रबंधन एवं वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर कार्य किया जाए, ताकि आगामी समय में पेयजल, सिंचाई एवं कृषि गतिविधियों के संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए।
जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण की तैयारियां, स्टॉप डेम में कड़ी शटर लगाने और नालों में बोरी बंधान का कार्य जारी
अल्पवर्षा के कारण जलाशयों में कम जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिले में उपलब्ध जल के समुचित प्रबंधन के साथ-साथ जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कार्य भी किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न उपयोगी स्थलों को चिन्हित कर स्टॉप डेम में कड़ी शटर लगाने तथा नालों में बोरी बंधान का कार्य जारी है। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा जल को अधिक समय तक रोकने तथा भू-जल स्तर में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं।