- सोयाबीन फसल में जड़ सड़न रोग के प्रभाव को रोकने किसानों को दी आवश्यक सलाह
बैतूल। जिले में किसानों द्वारा सोयाबीन फसल में पीला मोजेक रोग सहित अन्य रोगों के संबंध में प्राप्त शिकायतों को दृष्टिगत रखते हुए कृषि विभाग द्वारा सतत निगरानी एवं खेतों का निरीक्षण किया जा रहा है। उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक एवं विभागीय मैदानी अमले द्वारा निरंतर क्षेत्र का भ्रमण कर फसलों की स्थिति का अवलोकन किया जा रहा है।
इसी क्रम में विकासखंड भीमपुर के ग्राम लक्कड़जाम एवं आसपास के ग्रामों में उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग बैतूल श्री आरजी रजक, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर. डी. बारपेठे, बीमा कंपनी के जिला प्रतिनिधि श्री भैरवा, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी भीमपुर एवं क्षेत्रीय मैदानी अमले के साथ किसानों के खेतों का निरीक्षण एवं फसल का अवलोकन किया गया। निरीक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिक द्वारा अवगत कराया गया कि जिन सोयाबीन फसलों में किसानों द्वारा पीला मोजेक रोग की आशंका व्यक्त की जा रही है, उनमें दिखाई दे रहे लक्षण पीला मोजेक रोग के नहीं, बल्कि जड़ सड़न रोग के लक्षण हैं। जड़ सड़न रोग की रोकथाम के लिए आगामी फसल बोने से पूर्व बीज उपचार एवं भूमि उपचार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि आगामी समय में सोयाबीन की बोवनी के पूर्व अनुशंसित विधि से बीज उपचार एवं भूमि उपचार अवश्य करें, जिससे जड़ सड़न जैसे रोगों के प्रभाव को कम किया जा सके। जिले के कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन फसल में जड़ सड़न रोग का प्रभाव देखा जा रहा है, जिसके संबंध में विभाग द्वारा सतत निगरानी की जा रही है।
किसानों से अपील की गई है कि फसल में किसी भी प्रकार के रोग अथवा असामान्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं से किसी दवा का उपयोग न करें, बल्कि निकटतम कृषि विभाग के मैदानी अमले, कृषि वैज्ञानिक अथवा संबंधित कृषि अधिकारी से संपर्क कर उचित सलाह प्राप्त करें। किसानों से प्राप्त शिकायतों एवं फसल की वर्तमान स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए जिला स्तरीय निरीक्षण दल का गठन किया गया है। साथ ही विभागीय मैदानी अमले को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सतत निरीक्षण एवं निगरानी करने तथा फसल की स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित रूप से अवगत कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। कृषि विभाग द्वारा जिले में सोयाबीन फसल की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।