- एक साल में विधानसभा सत्रपांच बार बुलाया गया, बैठकें केवल 4 दिन हो पाईं
- अब केवल बजट सत्र ही 33 दिन का होगा
भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा का बजट सत्र 22 फरवरी से 26 मार्च तक होगा। जिसमें 23 बैठकें होंगी। विधानसभा सचिवालय ने इसकी अधिसूचना शुक्रवार देर शाम जारी कर दी है। पिछला बजट सत्र 11 दिन का था, लेकिन राज्यपाल लालजी टंडन (अब स्वर्गीय) 36 पन्नों के अभिभाषण का केवल एक ही पैरा पढ़ पाए थे। इसके बाद तत्कालीन अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने विधानसभा 26 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया था। 26 अगस्त को भी केवल राज्यसभा चुनाव की कार्यवाही हुई थी। विधानसभा सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल के अनुमोदन के बाद बजट सत्र आयोजित करने की अधिसूचना जारी की गई है। जिसमें 33 दिनों में 23 बैठकें होंगी। सत्र की शुरूआत राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण से होगी। इस दौरान वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा आगामी वित्तीय वर्ष 2021-2022 का बजट प्रस्तुत करेंगे तथा शासकीय एवं अशासकीय कार्य भी किए जाएंगे। लेकिन सरकार बजट किस दिन पेश करेगी, यह कैबिनेट की बैठक में तय किया जाएगा। अधिसूचना के मुताबिक इस सत्र के दौरान विधान सभा सचिवालय में अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं 24 फरवरी तक तथा अशासकीय संकल्पों की सूचनाएं 11 फरवरी तक प्राप्त की जाएंगी। जबकि स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तथा नियम-267 के अधीन दी जाने वाली सूचनाएं विधान सभा सचिवालय में 16 फरवरी से कार्यालयीन समय में प्राप्त की जाएगी।
15 मिनिट में समाप्त हो गया था पिछला बजट सत्र
पिछले साल बजट सत्र 16 मार्च से 31 मार्च तक आयोजित किया गया था, लेकिन कमलनाथ सरकार के अल्पमत में आने के कारण राजनीतिक संकट खड़ा होने के कारण गतिरोध पैदा हो गया था। मध्य प्रदेश विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पर अब राज्यपाल और सरकार आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद कमलनाथ को बहुमत साबित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन इससे पहले ही कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
एक साल में पांच बार बुलाए गया सत्र
पिछले बजट सत्र से अब तक पांच बार विधानसभा का सत्र बुलाया गया। जिसमें 17 बैठकें होना थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते केवल 4 बैठकें हो पाई। दिसंबर में तीन दिन सत्र बुलाया गया था, लेकिन विधानसभा के 36 कर्मचारियों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के कारण स्थगित कर दिया गया था। सितंबर 2020 में 21 से 23 तारीख तक तीन दिन का सत्र आहूत किया गया, लेकिन एक दिन में समाप्त कर दिया गया।
प्रदेश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ
कमलनाथ सरकार का कार्यकाल केवल 15 माह का रहा। लेकिन इस दौरान एक इतिहास विधानसभा में बना था। वर्ष 2019 में मानूसन सत्र 8 जुलाई से 26 जुलाई तक बैठकें प्रस्तावित हुआ। लेकिन 15 और 16 जुलाई (क्रमश: सोमवार और मंगलवार) को अवकाश होने के कारण विधानसभा की बैठक शनिवार और रविवार को भी आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही शनिवार को देर रात लगभग पौने ग्यारह बजे स्थगित होने के बाद रविवार सुबह 11 बजे फिर शुरू हो गई थी। प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब विधानसभा की कार्यवाही रविवार को भी हुई।
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