बैतूल। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे के निर्देशानुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सभी शासकीय हैंडपंपों तथा पेयजल स्रोतों का चरणबद्ध रूप से क्लोरीनेशन कराया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पेयजल स्रोतों को पूर्णतः जीवाणुरहित रखते हुए ग्रामीण नागरिकों को सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्षा ऋतु में भूजल एवं अन्य जल स्रोतों के दूषित होने की संभावना रहती है। इसे दृष्टिगत रखते हुए विभाग द्वारा नियमित रूप से हैंडपंपों तथा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन एवं विसंक्रमण कराया जा रहा है, जिससे जलजनित रोगों जैसे डायरिया आदि की रोकथाम की जा सके तथा ग्रामीणों को गुणवत्तायुक्त पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
विभाग द्वारा जिले के 5 उप-खंडीय जल परीक्षण प्रयोगशालाएं संचालित की जा रही हैं। आमजन अपने क्षेत्र के पेयजल की शुद्धता की जांच के लिए बैतूल प्रयोगशाला सुश्री ज्योति सरेयाम, सहायक यंत्री मो- 7974916270, भैंसदेही प्रयोगशाला श्री निखिल जैन, सहायक यंत्री मो- 8602617164, चिचोली प्रयोगशाला सुश्री वंदना उपराले, सहायक यंत्री मो- 9131146785, शाहपुर प्रयोगशाला श्री योगेश धुर्वे, सहायक यंत्री मो- 8458-868667, मुलताई प्रयोगशाला श्री संजीव नाखाते, सहायक यंत्री मो- 93020 36742 पर संपर्क कर सकते है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वर्षा ऋतु के दौरान जलजनित बीमारियों से बचाव पेयजल को हमेशा स्वच्छ, विसंक्रमित एवं ढक्कनदार बर्तनों में ही सुरक्षित रखे, पानी निकालने के लिए लंबे हैंडल वाले स्वच्छ बर्तन या करछी का उपयोग करें, सीधे हाथ पानी में न डालें, जनस्वास्थ्य की दृष्टि से, यदि संभव हो तो पेयजल को उबालकर एवं ठंडा करने के उपरांत ही उपयोग में लाएं।
हैंडपंप एवं अन्य पेयजल स्रोतों के परिधि के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें तथा गंदा पानी जमा न होने दें। यदि किसी क्षेत्र में पेयजल दूषित, गंधयुक्त अथवा संदिग्ध प्रतीत होता है, तो उसका उपयोग तत्काल रोकें और उपरोक्त संबंधित उप-खंडीय प्रयोगशाला प्रभारी या विभागीय अधिकारियों को त्वरित सूचना दे।