- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
बैतूल। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन ने 10 जुलाई को राष्ट्रीय आह्वान के तहत मांग दिवस पर आंदोलन और प्रदर्शन करने की घोषणा की है। यूनियन ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रही है तथा वर्ष 2018 से केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई मानदेय राशि का भुगतान आज तक नहीं किया गया है। यूनियन ने सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा कार्यकर्ताओं से आंदोलन में शामिल होकर अपनी लंबित मांगों के समर्थन में एकजुट होने की अपील की है।
यूनियन की जिलाध्यक्ष सुनीता राजपाल, उपाध्यक्ष आशा सूरजे और सचिव इंदिरा भारद्वाज द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रदेश में लगभग 1.94 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और शिक्षा सहित कई विभागों के कार्यों का दायित्व निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें कार्यस्थलों पर मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जिससे कई कार्यकर्ताओं की मृत्यु हो चुकी है तथा अनेक महिलाएं उच्च रक्तचाप, शुगर और माइग्रेन जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं।
यूनियन का कहना है कि अपने अधिकारों के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को ग्रेच्युटी तथा सेवारत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन से संबंधित आदेश दिए, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक उनका पालन नहीं किया। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सितंबर 2018 में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,500 रुपये, सहायिकाओं के मानदेय में 750 रुपये तथा मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 875 रुपये की वृद्धि कर 1 अक्टूबर 2018 से लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन राज्य सरकार ने इस बढ़ी हुई राशि का भुगतान नहीं किया।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इस मामले में उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका पर 21 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 1 अक्टूबर 2018 से बकाया राशि का 6 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश राज्य सरकार को दिया, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। यूनियन ने इसे महिला विरोधी रवैया बताते हुए सरकार पर न्यायपालिका के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया है।
यूनियन ने भाजपा समर्थित बताए जाने वाले संगठनों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो संगठन स्वयं को श्रमिकों, मजदूरों, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का हितैषी बताते हैं, वे सरकार के खिलाफ आंदोलन करने से बच रहे हैं। यूनियन ने ऐसे संगठनों से सावधान रहने और अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट होकर 10 जुलाई के आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।
आंदोलन को सफल बनाने की अपील करने वालों में यूनियन के जिला अध्यक्ष कामरेड कुंदन राजपाल, महासचिव पुष्पा वाकर, उपाध्यक्ष योगिता शिवहरे, सचिव सुनीता तिवारी, सोनम तायवाडे, कोषाध्यक्ष संगीता कनाठे, शबाना खान, प्रमिला मीरापुर, रामकली मर्सकोले, मीना जोठे, कल्पना बरडे, पुष्पा साहू, प्रेमता धुर्वे, ज्ञानवंती झोड, कंचन धोटे, तुलसी माथनकर, अर्चना धोटे सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हैं।